Ateli Mandi : अटेली अनाज मंडी में बाजरे की सरकारी खरीद को लेकर संकट लगातार छठे दिन भी गहराया रहा। स्थिति का जायजा लेने पहुंचे नारनौल के एसडीएम गुरविंदर सिंह ने किसानों, आढ़तियों और खरीद एजेंसी हैफेड के अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान तलाशने का प्रयास किया, लेकिन बात पूरी तरह बनती नहीं दिखी।
अनाज मंडी में किसान पिछले छह दिनों से अपनी फसल बेचने के लिए परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने के बावजूद खरीद कार्य ठप है। इस देरी से उन्हें फसल की समय पर राशि और भावांतर योजना का लाभ मिलने में रुकावट आ रही है।
गुणवत्ता के मानक और झरने का पेंच
हैफेड के जिला अधिकारी प्रवीण कुमार भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय पूल के तय मानकों पर खरा उतरने के बाद ही बाजरा खरीदा जाएगा। मानक पूरे करने के लिए एसडीएम ने मंडी में इलेक्ट्रिक झरना मंगवाने के निर्देश दिए, ताकि फसल की सफाई कर उसे खरीद योग्य बनाया जा सके।
आढ़तियों का विरोध और निजी बाजार का हाल
दूसरी ओर, आढ़तियों ने इलेक्ट्रिक झरने के इस्तेमाल से बढ़ने वाले अतिरिक्त मजदूरी खर्च को उठाने से साफ इनकार कर दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि इस कार्य के लिए उन्हें कोई अलग से कमीशन नहीं मिलता, इसलिए वे अतिरिक्त भार वहन करने में असमर्थ हैं। इस गतिरोध के बीच, स्थानीय निजी मंडी में बाजरा करीब 2,250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है।
एसडीएम ने किसानों से अपील की है कि वे ई-गेट पास के जरिए अपनी फसल का जे-फॉर्म समय पर तैयार करवाएं, ताकि सरकारी प्रक्रिया के तहत उन्हें उचित लाभ मिल सके। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद खरीद शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस मौके पर मार्केट कमेटी अध्यक्ष दिनेश जैलदार भी मौजूद थे ।
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