Balwant Singh Rajoana : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में पटियाला केंद्रीय जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की याचिका पर 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में जवाब दाखिल कर राजोआना को राहत देने का कड़ा विरोध किया है। केंद्र का रुख स्पष्ट होने के बाद अदालत ने फैसला किया है कि वह अब इस याचिका पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ाएगी।
केंद्र ने सुरक्षा और पंजाब के हालात का दिया हवाला
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि पंजाब की वर्तमान संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलना न्यायसंगत नहीं होगा। हालांकि, राजोआना के कानूनी प्रतिनिधियों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास उनकी दया याचिका साल 2012 से अनिर्णीत पड़ी है। दया याचिका पर फैसला लेने में केंद्र और राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से हुई 14 साल से अधिक की देरी को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया जा रहा है।
सचिवालय के बाहर हुआ था भीषण बम धमाका
यह मामला 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए भयावह बम विस्फोट से जुड़ा है। इस आत्मघाती हमले में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 17 अन्य लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। पंजाब पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात बलवंत सिंह राजोआना प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा हुआ था। राजोआना इस पूरे साजिश में बैकअप मानव बम के तौर पर तैनात था, जिसे पहला हमलावर दिलावर सिंह असफल होने पर विस्फोट करना था।
जुर्म कबूलने के बाद 2007 में मिली थी फांसी की सजा
दिसंबर 1995 में गिरफ्तारी के बाद राजोआना ने अदालत में बिना किसी हिचकिचाहट के अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। उसने कानूनी सहायता लेने या अपना पक्ष रखने के लिए कोई वकील नियुक्त करने से साफ इनकार कर दिया था।
इसके बाद 1 अगस्त 2007 को चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई, जिसे 2010 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी कायम रखा। अदालत ने 31 मार्च 2012 को फांसी देने की तिथि निर्धारित की थी।
14 साल से राष्ट्रपति के पास अटकी है दया याचिका
भारतीय न्यायिक व्यवस्था और कानून को न मानने का हवाला देते हुए राजोआना ने स्वयं कोई दया याचिका दायर नहीं की थी। इसके बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने संविधान के तहत राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की। पंजाब में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते मार्च 2012 में फांसी पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी।
वर्ष 2019 में श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर केंद्र सरकार ने सजा को उम्रकैद में बदलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हो सकी। पिछले 30 वर्षों से सलाखों के पीछे बंद राजोआना ने करीब 15-16 साल डेथ रो (फांसी की कोठरी) में काटे हैं।

