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Barnala News: बरनाला सिविल अस्पताल में मुफ्त दवाओं के दावे फेल, डॉक्टरों ने 'दवा उपलब्ध नहीं है' की मुहरें लगा मरीज लौटाए

VVinita Kohli
Barnala News: बरनाला सिविल अस्पताल में मुफ्त दवाओं के दावे फेल, डॉक्टरों ने 'दवा उपलब्ध नहीं है' की मुहरें लगा मरीज लौटाए
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बरनाला: पंजाब की सत्ताधारी ‘आम आदमी पार्टी’ द्वारा राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे ‘विश्व स्तरीय’ सुधारों के दावे बरनाला के सिविल अस्पताल में हवा होते नजर आ रहे हैं। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान और स्वास्थ्य मंत्री 100 प्रतिशत मुफ्त दवाइयाँ देने का ढिंढोरा पीट रहे हैं, वहीं बरनाला अस्पताल में मरीजों को दवाओं के स्थान पर ‘दवा नहीं है’ कि स्टैंप वाली जवाबी पर्ची दी जा रही है। 

ताजा मामला सिविल अस्पताल बरनाला की एक ओपीडी स्लिप (पर्ची) से सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं। 21 फरवरी को हरदेव कौर नामक मरीज के नाम पर काटी गई रजिस्ट्रेशन नंबर 2405 वाली पर्ची पर डॉक्टर द्वारा लगाई गई स्टैंप पर साफ लिखा है कि “मरीज को जिस दवा की आवश्यकता है वह सरकारी सप्लाई में उपलब्ध नहीं है।” 

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यह मुहर साबित करती है कि अस्पतालों में लगाए गए हेल्पलाइन नंबर 73472-00994 और ‘मुफ्त दवा’ के बोर्ड महज एक दिखावा बनकर रह गए हैं। दूसरी ओर, शहर वासियों का कहना है कि सरकार सिर्फ विज्ञापनबाजी में नंबर एक है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि गरीब मरीज महंगी दवाइयां बाहर से खरीदने को मजबूर हैं।

सिविल सर्जन की हैरानी: यह सरकारी स्टैंप नहीं, डॉक्टर की निजी स्टैंप है

जब इस गंभीर मामले के बारे में सिविल सर्जन बरनाला डॉ. हरीपाल सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह कोई विभागीय मुहर नहीं है। उन्होंने माना कि संबंधित डॉक्टर ने अपने स्तर पर यह स्टैंप बनवाई और इस्तेमाल की है। उन्होंने कहा कि हमने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और एसएमओ इंदु बंसल ने डॉक्टर को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 

सवाल यह उठता है कि यदि अस्पताल में दवाइयाँ हैं तो डॉक्टर को ऐसी स्टैंप लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि इस पर्ची या मुहर के फर्जी होने की भी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि एसएमओ इंदु बंसल से संपर्क किया जाए। जब उनसे एसएमओ इंदु बंसल का मोबाइल नंबर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नंबर नहीं है, किसी डॉक्टर से ले लो।

डीसी द्वारा जांच के आदेश, पर लोगों का भरोसा टूटा

मामला मीडिया में आने के बाद डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह ने जांच का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं है और इस मामले की उच्च स्तरीय पड़ताल करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि कोताही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

कहाँ गई ‘ईमानदारी’ और ‘बदलाव’?

सत्ताधारी पार्टी के ‘बदलाव’ के दावों पर तीखा हमला करते हुए समाजसेवी संगठनों ने कहा कि यदि सरकारी अमला खुद दवाओं की अनुपलब्धता की पुष्टि लिखित रूप में कर रहा है, तो यह स्वास्थ्य विभाग के मुँह पर एक करारा तमाचा है। लोगों ने मांग की है कि सिर्फ हेल्पलाइन नंबर जारी करने से मरीजों का इलाज नहीं होता, बल्कि अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।

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