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Barnala News: आईओएल फैक्ट्री के कर्मचारी की सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदूषण के काले सच का खुलासा

VVinita Kohli
Barnala News: आईओएल फैक्ट्री के कर्मचारी की सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदूषण के काले सच का खुलासा
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बरनाला: बरनाला के फतेहगढ़ छन्ना स्थित आईओएल केमिकल फैक्ट्री एक बार फिर बड़े विवादों में घिरती नजर आ रही है। मामला तब सामने आया, जब फैक्ट्री के एक पुराने कर्मचारी दर्शन सिंह (निवासी जोगा) द्वारा जारी किए गए कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। इन वीडियो में कर्मचारी ने फैक्ट्री के आंतरिक हिस्सों को दिखाते हुए प्रबंधकों पर प्रदूषण फैलाने और उसे धमकाने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। 

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी इस वीडियो में दर्शन सिंह ने दावा किया कि कंपनी की गलत गतिविधियां लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उसने वीडियो में वे जगहें दिखाएं, जहाँ कथित तौर पर केमिकल को ‘काली राख’ में मिलाया जाता है। दर्शन सिंह की वीडियो के अनुसार, इस प्रदूषण के कारण हंडियाया, बरनाला और आसपास के गाँवों में कैंसर जैसी भयानक बीमारियाँ घर कर रही हैं। उसने बताया कि जब उसने इसके विरुद्ध आवाज उठाई, तो प्रबंधकों ने उसे चुप कराने के लिए धमकियां दीं। 

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जब इस संबंध में कंपनी के प्रबंधक बसंत सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उक्त कर्मचारी नौकरी छोड़ चुका है और जानबूझकर कंपनी को बदनाम कर रहा है। हालांकि, एक अहम मोड़ तब आया जब प्रबंधकों ने यह पुष्टि तो की कि वायरल वीडियो फैक्ट्री के अंदर का ही है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि यह वीडियो कब का है, इस बारे में उन्हें कुछ पता नहीं है। प्रबंधकों द्वारा वीडियो की लोकेशन की पुष्टि होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। इस मामले के संबंध में प्रदूषण बोर्ड के एक्सईएन  राजीव गुप्ता का कहना था कि वे इस बारे में जाँच करवाएंगे और ऐसा कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

केंद्रीय या सीबीआई जांच की उठी मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब किसान और समाज सेवी संगठनों द्वारा इसकी केंद्रीय जांच एजेंसी या सीबीआई से जांच कराने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि पंजाब स्तर पर फैक्ट्री के प्रभाव के कारण अक्सर मामले दबा दिए जाते हैं। इसलिए एक स्वतंत्र जाँच ही फैक्ट्री के अंदरूनी कथित मामले और पर्यावरण के साथ किए जा रहे खिलवाड़ का सच सामने ला सकती है।

सवालों के घेरे में प्रशासन: हकीकत या आँखों पर पट्टी?

दर्शन सिंह द्वारा वायरल की गई यह वीडियो भले ही कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है, पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसकी हकीकत सामने लाने के लिए कोई सरकारी तंत्र आगे आएगा? या फिर प्रशासनिक आँखें बंद करके कैंसर जैसी नामुराद बीमारी को घर-घर ले जाने तक फैक्ट्री प्रबंधकों का इसी तरह साथ दिया जाता रहेगा? इलाके के लोग अब यह देख रहे हैं कि क्या सरकार लोगों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है या कॉर्पोरेट घरानों के हितों को।

विभागों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान

इस पूरे मामले ने न केवल फैक्ट्री प्रबंधकों, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जिम्मेदार सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी समय-समय पर होने वाली चेकिंग के दौरान इस ‘काली राख’ और जमीन के नीचे दबाए जा रहे केमिकल से बेखबर कैसे रहे? क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं? क्या औद्योगिक विभाग और प्रदूषण बोर्ड सिर्फ कागजी कार्यवाहियों तक सीमित है, जिस कारण ऐसी इकाइयाँ बिना किसी डर के पर्यावरण को प्रदूषित कर रही हैं? यदि एक कर्मचारी वीडियो बनाकर सच सामने ला सकता है, तो आधुनिक साजो-सामान से लैस सरकारी तंत्र इन कमियों को पकड़ने में असफल क्यों रहा?

आने वाले दिनों में बड़े संघर्ष के संकेत

वीडियो वायरल होने के बाद इलाके के किसानों में भारी रोष पाया जा रहा है, जो अब एक बड़े जन-संघर्ष का रूप धारण कर सकता है। विभिन्न किसान संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच के आदेश नहीं दिए, तो वे फैक्ट्री के खिलाफ संघर्ष शुरू करने से गुरेज नहीं करेंगे। जिससे यह स्पष्ट है कि प्रदूषण और धक्केशाही के विरुद्ध उठी यह आवाज अब महज सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़कों पर बड़े संघर्ष का रास्ता साफ करती प्रतीत होती है।

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