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बरनाला एक्सपायरी बियर मामला: क्या यह महज लापरवाही है या कोई बड़ी साजिश? जांच के घेरे में कई अनसुलझे सवाल

VVinita Kohli
बरनाला एक्सपायरी बियर मामला: क्या यह महज लापरवाही है या कोई बड़ी साजिश? जांच के घेरे में कई अनसुलझे सवाल
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बरनाला: बरनाला और हंडियाया क्षेत्र में शराब के ठेकों पर एक्सपायरी (मियाद खत्म) बियर बिकने का मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रह गया है। बल्कि इसने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जो ठेकेदारों और विभागीय सांठगांठ की ओर इशारा करते हैं। बीकेयू कादियां के नेता गुरविंदर सिंह नामधारी द्वारा उठाए गए बिंदुओं ने अब इस जांच की दिशा बदल दी है। एक्सपायरी बियर के साथ-साथ अब शराब ठेकेदारों द्वारा की जा रही आर्थिक लूट का मामला भी गरमा गया है। 

हैरानी की बात यह है कि बरनाला और हंडियाया क्षेत्र में बियर के रेट अलग-अलग ठेकों पर अलग-अलग वसूले जा रहे थे। ठेकेदार ग्राहकों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मनमर्जी के दाम वसूल रहे हैं। जहाँ एक ओर सरकारी नियमों के अनुसार रेट निर्धारित होने चाहिए, वहीं ठेकेदारों द्वारा अपनी मर्जी से कीमतें तय करना सीधे तौर पर प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ाने के बराबर है। एक्साइज विभाग की इस मामले पर चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या विभाग ने ठेकेदारों को लोगों की जेब काटने की खुली छूट दे रखी है?

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क्या शराब का स्टॉक भी एक्सपायरी था?

अभी तक सिर्फ बियर का मामला ही सामने आया है। लेकिन लोगों में यह चर्चा आम है कि यदि बियर की मियाद खत्म हो सकती है, तो क्या शराब का स्टॉक भी ऐसा होना संभव था? कई बार शराब के बैच नंबर और मियाद के बारे में आम ग्राहकों को पता नहीं चलता, जिसका फिलहाल खुलासा नहीं हो सका है।

पंजाब से बाहर की एजेंसी से जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मांग उठ रही है कि इसकी जांच पंजाब की स्थानीय एजेंसियों के बजाय किसी बाहरी स्वतंत्र जांच एजेंसी से करवाई जाए। तर्क यह दिया जा रहा है कि यदि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत हुई, तो निष्पक्ष जांच होना असंभव है। एक बाहरी एजेंसी ही इस बात का पता लगा सकती है कि इसके पीछे कौन सा बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

सरकार की परीक्षा: उच्च-स्तरीय जाँच या सिर्फ कागजी खानापूर्ति?

अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार इस मामले में एसआईटी गठित करके जाँच करवाएगी? या फिर हमेशा की तरह सिर्फ कागजी खानापूर्ति करके बड़े मगरमच्छों को बचा लिया जाएगा? अगर सरकार ने इस मामले में सख्त मिसाल पेश नहीं की, तो लोग यह समझेंगे कि जनता की सेहत से ज्यादा शराब ठेकेदारों का मुनाफा सरकार के लिए अहम है। एक्सपायरी बियर का बिकना एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह है, जिसकी जांच की तह तक जाना अनिवार्य है।

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