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Bhiwani Success Story: भिवानी का 'पावर पैक' परिवार: 4 सगे भाई-बहन बने पुलिस कॉन्स्टेबल, हरियाणा से दिल्ली तक डंका

AAmandeep Singh
भिवानी का 'पावर पैक' परिवार: 4 सगे भाई-बहन बने पुलिस कॉन्स्टेबल, हरियाणा से दिल्ली तक डंका
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भिवानी। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो अभाव की जमीन पर भी कामयाबी की फसल लहलहा सकती है। हरियाणा के भिवानी जिले का छोटा सा गांव संडवा आज इसी कहावत का जीता-जागता गवाह बना है। यहां के एक साधारण किसान उत्तर सिंह के घर से जब चार बच्चे एक साथ पुलिस की वर्दी पहनकर निकलते हैं, तो पूरे गांव का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है जहाँ चार सगे भाई-बहनों ने अपनी मेहनत के दम पर पुलिस महकमे के अलग-अलग विंग में कॉन्स्टेबल बनकर ‘खाकी’ का मान बढ़ाया है।

पिता जोतते थे खेत, बच्चे बुनते थे कामयाबी के सपने

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उत्तर सिंह और उनकी पत्नी खुद ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने पांचों बच्चों की पढ़ाई में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। खेती की मामूली आय और घर की तंगहाली के बीच उत्तर सिंह ने बच्चों को सिर्फ एक ही बात सिखाई— ‘शिक्षा ही गरीबी की बेड़ियों को काट सकती है’। बच्चों ने भी पिता के पसीने की कीमत समझी और दिन-रात किताबों के साथ खुद को तपाया।

आज आलम यह है कि उत्तर सिंह की बेटी सुदेश चंडीगढ़ पुलिस में, उर्मिला रेलवे पुलिस (अंबाला) में और मोनिका दिल्ली पुलिस में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वहीं, बेटा हरियाणा पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात है। बड़े बेटे श्यामसुंदर, जो स्कूल में शिक्षक हैं, अपने भाई-बहनों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका में रहे।

सीमित संसाधनों में असीमित उड़ान

बड़े भाई श्यामसुंदर बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से हुई। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही इन भाई-बहनों ने प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। घर में न कोई बड़ा कोचिंग सेंटर था और न ही शहर जैसी सुविधाएं, लेकिन उनके पास था तो बस लक्ष्य के प्रति जुनून। श्यामसुंदर का कहना है कि जब चारों भाई-बहन एक साथ वर्दी पहनकर घर लौटते हैं, तो पूरे इलाके के लिए वह दृश्य प्रेरणा का स्रोत बन जाता है।

“मजबूत लक्ष्य हो तो बाधाएं खुद रास्ता छोड़ देती हैं”

संडवा गांव में आज उत्सव जैसा माहौल है। उत्तर सिंह के घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहता है। इस परिवार की कहानी अब सोशल मीडिया से लेकर चौपालों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। इन युवाओं का संदेश साफ है— यदि लक्ष्य मजबूत हो और मेहनत में ईमानदारी, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता की राह का रोड़ा नहीं बन सकती। भिवानी के ये चार ‘रक्षक’ अब अपनी ईमानदारी और सेवा से न केवल समाज की रक्षा करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ी को यह भी बताएंगे कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।

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