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भूमि पेडनेकर ने कहा- जग 'भीड़' और 'अफवाह' जैसी फिल्में बेहतर प्रदर्शन नहीं करती तो दिल दुखता है

VVinita Kohli
भूमि पेडनेकर ने कहा- जग 'भीड़' और 'अफवाह' जैसी फिल्में बेहतर प्रदर्शन नहीं करती तो दिल दुखता है
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मुंबई: अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का कहना है कि जब अच्छी और जरूरी मुद्दों पर बनी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पातीं, तो उन्हें बहुत दुख होता है। उनका मानना है कि इसकी जिम्मेदारी सिर्फ फिल्म निर्माताओं की नहीं, बल्कि दर्शकों की भी होती है, क्योंकि दर्शकों की पसंद ही यह तय करती है कि आगे किस तरह की फिल्में बनेंगी।

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‘भीड़’ और ‘अफवाह’ का जिक्र

भूमि ने अपनी फिल्मों ‘भीड़’ और ‘अफवाह’ का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों ही फिल्में समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर बनी थीं, लेकिन इसके बावजूद सिनेमाघरों में ज्यादा समय तक टिक नहीं पाईं। ‘भीड़’ में महामारी और प्रवासी मजदूरों के संकट को दिखाया गया था, जबकि ‘अफवाह’ में फेक न्यूज जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया गया था। इन फिल्मों को आलोचकों ने सराहा, लेकिन दर्शकों का भरपूर समर्थन नहीं मिल पाया।

दर्शकों की भी बनती है जिम्मेदारी

“जब ‘भीड़’ और ‘अफवाह’ जैसी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं करतीं, तो वाकई दिल दुखता है। यह जिम्मेदारी सिर्फ फिल्म बनाने वालों की नहीं है। अगर दर्शक अच्छी कहानी वाली फिल्में देखेंगे, तभी ऐसी फिल्में बनेंगी।” उन्होंने आगे कहा कि अगर दर्शक केवल बड़ी और महंगी फिल्मों को ही देखेंगे, तो छोटी और सार्थक फिल्मों के लिए जगह कम होती जाएगी।

शुक्रवार के आंकड़ों तक सीमित हो गई फिल्मों की चर्चा 

भूमि का मानना है कि आजकल फिल्मों को सिर्फ पहले दिन की कमाई यानी शुक्रवार के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से आंका जाने लगा है। उन्होंने कहा, “पहले फिल्मों को दर्शकों की आपसी तारीफ से चलाया जाता था। अब हर चीज़ शुक्रवार के कलेक्शन पर टिकी होती है। हर फिल्म 10 या 20 करोड़ की ओपनिंग नहीं ले सकती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फिल्म खराब है।”

‘वर्ड ऑफ माउथ’ का असर हो गया है कम

भूमि ने कहा कि पहले ‘वर्ड ऑफ माउथ’ यानी लोगों की आपसी तारीफ से फिल्में धीरे-धीरे लोकप्रिय होती थीं, लेकिन अब यह चलन लगभग खत्म हो गया है। इसी वजह से कई अच्छी फिल्में और नए कलाकारों को मौका नहीं मिल पाता।

‘12वीं फेल’ और ‘लापता लेडीज’ का जिक्र

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्म ‘12वीं फेल’ को इसलिए सफलता मिली क्योंकि इसके निर्माता फिल्म को लेकर भरोसेमंद थे और उसे समय दिया गया।

इसी तरह किरण राव की फिल्म ‘लापता लेडीज’ को भी सिनेमाघरों में शुरुआत में ज्यादा दर्शक नहीं मिले, लेकिन ओटीटी पर आने के बाद लोगों ने उसे खूब पसंद किया।

बड़ी और छोटी, हर तरह की फिल्मों में विश्वास

इस सवाल पर कि आजकल सिर्फ बड़ी फिल्में ही सिनेमाघरों में चल रही हैं, भूमि ने कहा कि उन्हें आदित्य धर की फिल्म बहुत पसंद आई, जिसने दुनिया भर में 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की।

उन्होंने यह भी कहा कि वह हमेशा अलग-अलग तरह की फिल्में करने की कोशिश करती रही हैं—चाहे वह ‘सोनचिरिया’ जैसी गंभीर फिल्म हो या ‘पति पत्नी और वो’ जैसी व्यावसायिक फिल्म।

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