Cabinet Minister Aman Arora : चंडीगढ़ और संगरूर की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही उठापटक पर बड़ा बयान दिया है।
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कांग्रेस हाईकमान पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी ने राज्य में कार्यकर्ताओं की आवाज को दरकिनार कर दिया है। विभिन्न गुटों के बीच आपसी समझौतों के तहत नेतृत्व थोपा जा रहा है, जिसका सीधा असर जमीनी स्तर पर काम करने वाले उन कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है जो सालों से पार्टी का आधार मजबूत करने में जुटे हैं।
परगट सिंह को दी बधाई, पर नेतृत्व परिवर्तन के तरीके पर उठाए सवाल
अपने संबोधन की शुरुआत में अमन अरोड़ा ने कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह को अपनी और पार्टी की तरफ से शुभकामनाएं दीं। परगट सिंह के खेल और प्रशासनिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक जाने-माने ओलंपियन, पूर्व पुलिस अधिकारी और तीन बार के विधायक रहे हैं, जिन्होंने खेल के मैदान में शानदार नेतृत्व किया है।
हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने कांग्रेस के भीतर चल रहे अंदरूनी कलह और फैसलों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए। अरोड़ा का कहना था कि इस नियुक्ति के बाद जिस तरह के घटनाक्रम सामने आए हैं, वे साफ तौर पर पार्टी की गहरी आंतरिक अस्थिरता को उजागर करते हैं।
राजा वड़िंग के जाने और सचिन पायलट के फैसलों पर तंज
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के कार्यकाल का हवाला देते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में पार्टी की कमान संभाली थी और करीब साढ़े चार साल तक कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था।
लेकिन हाल ही में बदले राजनीतिक घटनाक्रम में, नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने अपने महज दो घंटे के संक्षिप्त दौरे के दौरान ही उन्हें पद से हटाने का बड़ा फैसला ले लिया। अरोड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि इस तरह के ताबड़तोड़ और एकतरफा फैसले उन समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं के मनोबल को गहरी ठेस पहुंचाते हैं जो पार्टी के लिए जमीन पर पसीना बहाते हैं।
मालवा और संगरूर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप
बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अमन अरोड़ा ने क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि भले ही विजय इंदर सिंगला विपक्षी दल से ताल्लुक रखते हों, लेकिन संगरूर और पूरे मालवा क्षेत्र के लोगों को यह उम्मीद थी कि इस बार उनके इलाके के किसी दिग्गज नेता को प्रदेश की कमान सौंपी जाएगी। काफी समय से उनके नाम पर चर्चा भी चल रही थी, लेकिन अंतिम क्षणों में उनकी अनदेखी कर दी गई। अरोड़ा ने इसे मालवा क्षेत्र की जनता की उम्मीदों और भावनाओं के साथ सीधा विश्वासघात करार दिया है।
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