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Chandigarh News: उच्च स्तरीय सम्मेलन में मानव तस्करी रोकने की रणनीति पर हुआ मंथन, पुलिस व संस्थाओं ने साझा किया रोडमैप

VVinita Kohli
Chandigarh News: उच्च स्तरीय सम्मेलन में मानव तस्करी रोकने की रणनीति पर हुआ मंथन, पुलिस व संस्थाओं ने साझा किया रोडमैप
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चंडीगढ़: यूटी पुलिस द्वारा मंगलवार को मानव तस्करी के खिलाफ एक राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान, संगम हॉल में किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में कुल 126 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंडीगढ़ के डीजीपी डॉ. सागरप्रीत हुड्डा (आईपीएस) रहे। उनके अलावा डीआईजी राजीव रंजन (आईपीएस), एसएसपी कंवरदीप कौर (आइपीएस), एसपी (सिटी) प्रियंका (आईपीएस) सहित चंडीगढ़ पुलिस के सभी डीएसपी, एसएचओ और इंस्पेक्टर भी मौजूद रहे। 

सम्मेलन में विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थाओं और विभागों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इनमें चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीसीपीसीआर) की चेयरपर्सन शिप्रा बंसल, जिला एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (डीडीए), असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (एपीपी), स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और श्रम विभाग के अधिकारी शामिल रहे। इसके अलावा डिस्ट्रीक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट (यूटीसीपीसी), चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), स्नेहालय, नारी निकेतन, ‘उम्मीद’ नामक एनजीओ और जिला युवा विकास संगठन के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई, जो मानव तस्करी के खिलाफ बहु-एजेंसी समन्वय को दर्शाता है। 

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सम्मेलन के दौरान चार प्रमुख सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में पूर्व डीजीपी डॉ. पीएम नायर (आईपीएस) ने मानव तस्करी के आयाम, उभरते रुझान और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग, अंतर-राज्य समन्वय और तस्करी नेटवर्क की सक्रिय पहचान पर जोर दिया। दूसरे सत्र में एसएलएसए, चंडीगढ़ के सदस्य सचिव अरुण कुमार अग्रवाल ने पीड़ितों के पुनर्वास और केंद्र सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डाला तथा बचाव के बाद देखभाल और पुनर्वास तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। 

तीसरे सत्र में सेवानिवृत्त डीजीपी डॉ. केपी सिंह ने आईपीसी/बीएनएस, इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट (एटीपीए), पॉक्सो एक्ट (पॉक्सो) और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (जेजे एक्ट) के तहत कानूनी प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रभावी अभियोजन और पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। चौथे सत्र में हरियाणा सरकार के स्टेट कमीशन फोर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के पूर्व सदस्य परमजीत सिंह बडोला ने एनजीओ की भूमिका, रेस्क्यू ऑपरेशन, पुनर्वास और पुलिस के साथ समन्वय की अहमियत को रेखांकित किया। 

सम्मेलन के हाइलाइट्स में अंतर-विभागीय समन्वय और खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर, पीड़ितों की पहचान, बचाव और पुनर्वास तंत्र को मजबूत बनाना, क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, कानूनी ढांचे को सुदृढ़ करना तथा एनजीओ और समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करना शामिल रहा। सम्मेलन के संभावित प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इससे पुलिस, कानूनी एजेंसियों और सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा, जिससे मानव तस्करी के मामलों में तेज और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी। जांच और अभियोजन मजबूत होने से दोषियों की सजा दर में वृद्धि की उम्मीद है।

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