चरखी दादरी। चरखी दादरी में सोमवार को राजनीति का पारा उस वक्त चढ़ गया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रसोई गैस की कीमतों और किल्लत को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। जिला अध्यक्ष सुशील कुमार की अगुवाई में एकजुट हुए कार्यकर्ताओं ने शहर के मुख्य बाजारों से मार्च निकाला। प्रदर्शन का नजारा बेहद तल्ख था—कार्यकर्ता कंधे पर खाली सिलेंडर रखकर उसकी ‘शव यात्रा’ निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस तरह से सिलेंडर के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, उससे मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का बजट पूरी तरह दम तोड़ चुका है।
“संसद से गायब नरेंद्र – देश से गायब सिलेंडर”: तीखे नारों से घेरी सरकार
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने जमकर नारेबाजी की। “संसद से गायब नरेंद्र – देश से गायब सिलेंडर” जैसे कटाक्ष भरे नारों के जरिए केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला गया। कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और उज्ज्वला योजना का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर आलम यह है कि लोगों को रिफिल के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है। नेताओं ने दो टूक कहा कि भाजपा राज में ‘अच्छे दिन’ केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गए हैं और हकीकत में गरीब की थाली से रोटी और चूल्हे से गैस गायब होती जा रही है।
विरोध के सुरों के बीच ‘अपनों’ की बेरुखी: गुटबाजी फिर आई सामने
भले ही सड़कों पर प्रदर्शन जोरदार दिखा, लेकिन पार्टी के भीतर की दरारें छिपाए नहीं छिप सकीं। शहर में चर्चा का विषय महंगाई से ज्यादा कांग्रेस की आपसी खींचतान रही। गौर करने वाली बात यह रही कि साल 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं मनीषा सांगवान इस महत्वपूर्ण प्रदर्शन से पूरी तरह नदारद रहीं। उनके अलावा भी कई स्थानीय क्षत्रप इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए। राजनीतिक गलियारों में इस ‘दूरी’ के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक कांग्रेस जमीनी मुद्दों पर एक साथ मंच पर नहीं दिखेगी, तब तक ऐसे प्रदर्शनों का चुनावी लाभ मिलना मुश्किल है।
आम जनता की बढ़ती परेशानियां
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गैस की किल्लत दूर नहीं की गई और कीमतों में कटौती नहीं हुई, तो कांग्रेस अपने आंदोलन को और उग्र करेगी। उधर, आम जनता भी इस राजनीतिक रस्साकशी के बीच पिस रही है। दादरी के बाजारों में चर्चा रही कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन सिलेंडर की सप्लाई में आ रही बाधा ने वाकई गृहिणियों का सिरदर्द बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि विपक्ष के इस शोर का सरकार और प्रशासन पर कितना असर पड़ता है।

