Delhi Lifestyle American Woman: दुनियाभर में लोग अक्सर अमेरिका और लंदन की चमक-धमक, वहां की हाई-फाई लाइफस्टाइल और आधुनिक सुविधाओं की तारीफ करते नहीं थकते।
लेकिन जरा सोचिए, जब कोई अमेरिकी नागरिक दिल्ली की तंग गलियों और नुक्कड़ की दुकानों की मुरीद हो जाए, तो इसे क्या कहेंगे? इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। (American Creator Delhi Video) दिल्ली में रहने वाली अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर क्रिस्टन फिशर (Kristen Fisher) ने भारत के पारंपरिक किराना स्टोरों को लेकर कुछ ऐसा कह दिया है, जिससे हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा।
सुबह की सैर और नुक्कड़ की दुकान का अनुभव
वायरल हो रहे इस वीडियो में क्रिस्टन फिशर ने बताया कि उनके घर से सिर्फ एक मिनट की पैदल दूरी पर एक छोटी सी किराना दुकान है। वे सुबह टहलते हुए आराम से उस दुकान पर जाती हैं, अपनी जरूरत का दूध खरीदती हैं, कैश में भुगतान करती हैं (Delhi Kirana Store Viral Video) और हंसते-खेलते अपने घर वापस लौट आती हैं। अमेरिका जैसी जगहों की भागदौड़ भरी जिंदगी से बिल्कुल उलट, दिल्ली के इस छोटे से रूटीन ने उनका दिल जीत लिया है।
‘यही तो भारत के कामकाज की असली रीढ़ है’
क्रिस्टन ने वीडियो में खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि भारत के बारे में उन्हें सबसे अच्छी बात यह लगती है कि यहां हर नुक्कड़ पर छोटी-छोटी दुकानें मौजूद हैं। जरूरत का हर छोटा-बड़ा सामान कुछ ही कदमों की दूरी पर आसानी से मिल जाता है।
उन्होंने इन लोकल किराना स्टोर्स को देश की व्यवस्था की रीढ़ और संस्कृति की एक अनमोल शान करार दिया है। क्विक कॉमर्स और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स के इस दौर में जहां लोगों का पैदल चलना और बाहर निकलना लगभग छूट सा गया है, वहां एक विदेशी महिला का इस सादगी पर फिदा होना वाकई अनोखा है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी मजेदार बहस
क्रिस्टन का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। लोग भारत और पश्चिमी देशों की जीवनशैली की तुलना करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा कि हम भारतीय अक्सर उन छोटी-छोटी सुविधाओं को नजरअंदाज कर देते हैं जो हमें बिना किसी झंझट के मिल जाती हैं, जबकि अमेरिका में छोटी चीज के लिए भी मीलों ड्राइव करना पड़ता है। वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि विडंबना देखिए कि एक अमेरिकी महिला भारत की नुक्कड़ दुकान की तारीफ कर रही है, और हम एनआरआई लोग विदेश जाकर बड़े मॉल्स के चक्कर काटने में लगे रहते हैं।

