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Munak Canal Elevated Corridor: दिल्ली-हरियाणा के बीच 'मुनक कॉरिडोर': जाम के जंजाल से मिलेगी मुक्ति, रफ़्तार भरेगी राजधानी

AAmandeep Singh
दिल्ली-हरियाणा के बीच 'मुनक कॉरिडोर': जाम के जंजाल से मिलेगी मुक्ति, रफ़्तार भरेगी राजधानी
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हरियाणा। राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और NHAI ने मिलकर एक मास्टर प्लान तैयार किया है। मुनक नहर के समानांतर प्रस्तावित यह 16 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर उत्तरी दिल्ली की लाइफलाइन बनने जा रहा है। यह प्रोजेक्ट पिछले काफी समय से फाइलों में दबा था, लेकिन हाल ही में गृह मंत्रालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक ने इसमें नई जान फूंक दी है। दिल्ली और हरियाणा के अधिकारियों के बीच हुई सकारात्मक चर्चा के बाद अब उम्मीद जगी है कि मुनक नहर पर निर्माण के लिए जरूरी एनओसी जल्द ही मिल जाएगी।

इंद्रलोक से सीधे बवाना: 16 किमी का सफर होगा ‘सिग्नल-फ्री’

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प्रस्तावित योजना के अनुसार, यह कॉरिडोर इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर बवाना स्थित अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) तक जाएगा। वर्तमान में इस रूट पर भारी ट्रैफिक और संकरी सड़कों के कारण पीक ऑवर्स में घंटों का समय बर्बाद होता है। इस एलिवेटेड रोड के बनने से यह पूरा स्ट्रेच पूरी तरह सिग्नल-फ्री हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो रोहिणी, बवाना, नरेला और सोनीपत की ओर से मध्य दिल्ली की तरफ आते हैं। जानकारों की मानें तो इस कॉरिडोर से लाखों लीटर ईंधन और कीमती समय की बचत होगी।

4700 करोड़ का बजट और NHAI की कमान

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कमान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपी गई है। करीब 4700 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाले इस प्रोजेक्ट की डीपीआर (DPR) पहले ही तैयार की जा चुकी है। मुनक नहर के ऊपर से गुजरने के कारण यह इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना होगा, क्योंकि नहर के बहाव और सुरक्षा को प्रभावित किए बिना पिलर खड़े करना एक बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि हरियाणा सिंचाई विभाग से एनओसी मिलना इस प्रोजेक्ट की सबसे अनिवार्य शर्त है, क्योंकि मुनक नहर हरियाणा से दिल्ली को पानी की आपूर्ति करती है।

दिल्ली-NCR के कनेक्टिविटी मैप में बड़ा बदलाव

यह कॉरिडोर केवल एक सड़क नहीं, बल्कि दिल्ली के कनेक्टिविटी मैप को बदलने वाला साबित होगा। बवाना में इसे UER-2 से जोड़ा जाएगा, जो दिल्ली के तीसरे रिंग रोड के तौर पर विकसित हो रहा है। इससे एयरपोर्ट और एनएच-44 (जीडी रोड) की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर फंसे बिना सीधा रास्ता मिल जाएगा। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही हरियाणा सरकार की ओर से औपचारिक मंजूरी मिलती है, टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगले 3-4 सालों के भीतर इस प्रोजेक्ट को पूरा कर जनता को समर्पित कर दिया जाए।

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