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Namo Bharat Train Delhi Panipat: दिल्ली-पानीपत-करनाल RRTS: 21 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार

AAmandeep Singh
दिल्ली-पानीपत-करनाल RRTS: 21 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार
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हरियाणा। एनसीआर से लेकर हरियाणा के दिल कहे जाने वाले करनाल तक का सफर अब पूरी तरह बदलने वाला है। दिल्ली-पानीपत नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। करीब 21 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली इस परियोजना को लेकर पानीपत के जिला उपायुक्त (DC) डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने मंगलवार को समीक्षा बैठक की। इस बैठक का सीधा संदेश यही है कि अब कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर काम जमीन पर शुरू होने जा रहा है। 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली यह ट्रेन न केवल समय बचाएगी, बल्कि हरियाणा के औद्योगिक बेल्ट की सूरत भी बदल देगी।

पानीपत में बनेंगे 4 आधुनिक स्टेशन, जमीन का खाका तैयार

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डीसी डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भूमि अधिग्रहण और स्टेशनों के निर्माण में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पानीपत जिले की सीमा में कुल चार स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें समालखा, पानीपत ISBT (सिवाह), शहर के बीचों-बीच एक अंडरग्राउंड स्टेशन और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सेक्टर-18 में एक अतिरिक्त स्टेशन बनाया जाएगा। इसके अलावा, समालखा और पानीपत में रेलवे सर्विस स्टेशन के लिए भी जमीन चिह्नित कर ली गई है। प्रशासन की कोशिश है कि निर्माण कार्य शुरू होते समय जमीन से जुड़ा कोई भी तकनीकी पेच न फंसे।

एक ही चरण में पूरा होगा काम: दिल्ली से करनाल की दूरी होगी कम

RRTS के डिप्टी चीफ इंजीनियर शाहाबाद आलम ने बैठक में बताया कि प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) को संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल चुकी है। सबसे खास बात यह है कि दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर को अलग-अलग टुकड़ों में बनाने के बजाय एक ही चरण में विकसित किया जाएगा। इससे प्रोजेक्ट की लागत और समय दोनों की बचत होगी। वर्तमान में दिल्ली से करनाल जाने वाले यात्रियों को घंटों जाम से जूझना पड़ता है, लेकिन नमो भारत के शुरू होने के बाद यह दूरी बेहद आरामदायक और फर्राटेदार हो जाएगी।

आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

इस कॉरिडोर का सीधा असर जीटी रोड के ट्रैफिक पर पड़ेगा। रोजाना दिल्ली-पानीपत-करनाल के बीच सफर करने वाले हजारों नौकरीपेशा और व्यापारियों के लिए यह ट्रेन किसी वरदान से कम नहीं होगी। जानकारों का मानना है कि जब आवाजाही आसान होती है, तो आर्थिक गतिविधियां अपने आप रफ्तार पकड़ती हैं। इस कॉरिडोर के किनारे नए बिजनेस हब विकसित होंगे और रियल एस्टेट सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि आपसी समन्वय से इस प्रोजेक्ट को तय समय-सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाए, ताकि लोगों को भीड़भाड़ से मुक्ति मिल सके।

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