Dhruv Rathee: लोकप्रिय यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी की गिरफ्तारी और हिरासत का मामला इन दिनों तूल पकड़ता जा रहा है। हिरासत से रिहा होने के बाद ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, यह सामान्य कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि जबरन उठाकर उन्हें बंधक बनाने जैसी स्थिति थी।
घटनाक्रम की शुरुआत 7 और 9 अक्टूबर को उनके द्वारा जारी किए गए वीडियो से हुई थी, जिसमें उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट और 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। ध्रुव ने दावा किया था कि प्रोटेस्ट को रोकने के लिए दिल्ली में मेट्रो स्टेशन और बसें तक बंद कर दी गईं।
सादे कपड़ों में घर में घुसने और किडनैपिंग का आरोप
ध्रुव राठी का कहना है कि शनिवार की सुबह सादे कपड़ों में करीब 20 लोग उनके गुरुग्राम स्थित घर में दाखिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन लोगों ने उनकी मां को धक्का दिया और उन्हें बेडरूम से घसीटते हुए बाहर लाए और जीप में डालकर ले गए। (dhruv rathee latest news) उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को ‘किडनैपिंग’ करार देते हुए कहा कि उन्हें उनके वंशीय या कानूनी अधिकारों से वंचित रखा गया और लगभग 22 से 23 घंटे तक थाने में कैद रखा गया। हालांकि, पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें गुरुग्राम के सेक्टर-39 स्थित क्राइम ब्रांच थाने में रखा गया था।
पासपोर्ट दिखाकर दिया आलोचकों को जवाब
वीडियो के दौरान ध्रुव राठी ने अपनी राष्ट्रीयता पर चल रही चर्चाओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कैमरे के सामने अपना भारतीय पासपोर्ट दिखाते हुए कहा कि जो लोग उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वे इस सच्चाई को देख लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे भारतीय हैं, भारतीय थे और हमेशा भारतीय रहेंगे। उनकी रगों में देश का खून है और वे राष्ट्रहित व जनहित के मुद्दों पर बोलने से पीछे नहीं हटेंगे।
देश में अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात: राठी
सरकार और व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए ध्रुव राठी ने कहा कि आज देश के हालात ‘अघोषित आपातकाल’ जैसे हो गए हैं। सरकार की नीतियों और फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने वाले हर स्वतंत्र नागरिक या पत्रकार को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। (delhi police detention dhruv rathee) उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश की स्वतंत्र संस्थाएं जैसे चुनाव आयोग, मीडिया और न्यायपालिका दबाव में काम कर रही हैं, जिससे लोकतांत्रिक ताने-बाने को कमजोर किया जा रहा है। बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया गलियारों में बहस तेज हो गई है।
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