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ED Action Haryana Rajasthan: ईडी का एक्शन: हरियाणा और राजस्थान में 944 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, 1500 खरीदार हुए थे ठगी के शिकार

AAmandeep Singh
ईडी का एक्शन: हरियाणा और राजस्थान में 944 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, 1500 खरीदार हुए थे ठगी के शिकार
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हरियाणा। अपना घर होने का सपना देख रहे मध्यमवर्गीय परिवारों की गाढ़ी कमाई डकारने वाले बिल्डरों पर जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा और राजस्थान के चार प्रमुख शहरों में सक्रिय रहे ‘पीयूष कॉलोनाइजर्स लिमिटेड’ के खिलाफ बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए ईडी ने कंपनी की लगभग 944 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई उन 1,500 से अधिक खरीदारों के लिए इंसाफ की पहली किरण मानी जा रही है, जो सालों पहले पूरा भुगतान करने के बाद भी आज तक दर-दर भटक रहे हैं।

पलवल से भिवाड़ी तक फैली थी जालसाजी की जड़ें

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ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि बिल्डर ने पलवल, फरीदाबाद, रेवाड़ी और राजस्थान के भिवाड़ी में कई बड़ी आवासीय परियोजनाएं शुरू की थीं। आकर्षक विज्ञापनों और लुभावने वादों के जाल में फंसकर सैकड़ों लोगों ने अपनी जमा पूंजी इन प्रोजेक्ट्स में लगा दी। अधिकारियों के मुताबिक, बिल्डर ने ग्राहकों से पैसा तो वसूला, लेकिन उसे प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय कथित तौर पर दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया। कुर्क की गई संपत्तियों में प्रोजेक्ट की जमीन, तैयार और अर्ध-निर्मित फ्लैट, भारी मात्रा में कृषि भूमि और प्राइम लोकेशन पर स्थित कमर्शियल स्पेस शामिल हैं।

पूर्व प्रमोटरों की बेनामी संपत्तियां भी जांच के घेरे में

प्रवर्तन निदेशालय ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल कंपनी तक सीमित नहीं है। पीयूष कॉलोनाइजर्स लिमिटेड के पूर्व प्रवर्तकों और उनके व्यावसायिक सहयोगियों के नाम पर रजिस्टर्ड संपत्तियों को भी अटैच किया गया है। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि खरीदारों से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल अवैध रूप से निजी संपत्तियां बनाने और मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया। फरीदाबाद और पलवल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में इस कंपनी के कई प्रोजेक्ट्स अधर में लटके हैं, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

क्या अब घर खरीदारों को मिलेगा हक?

रियल एस्टेट सेक्टर में इस तरह की बड़ी जब्ती से उन कॉलोनाइजर्स को कड़ा संदेश गया है जो कब्जा देने में सालों की देरी करते हैं। ईडी अब इस मामले में मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन का रास्ता) की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 944 करोड़ रुपये के अलावा और कितनी रकम इधर-उधर की गई है। हालांकि, संपत्तियों की कुर्की के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन कुर्क संपत्तियों के जरिए उन 1,500 पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलेगा या फिर उन्हें उनके सपनों का आशियाना मिल पाएगा। फिलहाल, इस बड़ी कार्रवाई ने एनसीआर और राजस्थान के प्रॉपर्टी बाजार में हलचल पैदा कर दी है।

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