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Pratap Nagar Eid Namaz: प्रताप नगर और छछरौली में ईद-उल-अजहा की धूम, ईदगाहों में गूंजी अमन और भाईचारे की दुआ

AAmandeep Singh
Pratap Nagar Eid Namaz: प्रताप नगर और छछरौली में ईद-उल-अजहा की धूम, ईदगाहों में गूंजी अमन और भाईचारे की दुआ
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यमुनानगर। (रघबीर सिंह) यमुनानगर जिले के प्रताप नगर (खिजराबाद) और छछरौली के आसपास के ग्रामीण इलाकों में वीरवार को ईदुज्जुहा (बकरीद) का पर्व पूरे धार्मिक उल्लास और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही क्षेत्र की फिजाओं में त्योहार की रौनक साफ नजर आने लगी थी।

नए-नए लिबासों में सजे बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग सुबह से ही अपने नजदीकी नमाज स्थलों की तरफ बढ़ने लगे थे। बांबेपुर, नागल पट्टी मिल्क, ताजेवाला, फैजपुर, छछरौली और कोट ताहरपुर की ऐतिहासिक ईदगाहों में सुबह जैसे ही नमाज शुरू हुई, पूरा परिसर अकीदत के रंग में सराबोर हो गया। कतारों में बैठे हजारों लोगों ने एक साथ खुदा की बारगाह में सिर झुकाया।

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अपनों की याद और कुर्बानी की रस्म के साथ साझा कीं खुशियां

नमाज मुकम्मल होने के ठीक बाद इमामों ने मुल्क की तरक्की, आपसी सद्भाव और भाईचारे के लिए दुआ कराई, जिसमें हर आंख नम और हर हाथ देश में अमन-चैन के लिए दुआ मांगता नजर आया। इसके बाद शुरू हुआ ईद की मुबारकबाद का सिलसिला, जहां मजहबी सरहदों को भुलाकर लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया।

ईदगाहों से फारिग होने के बाद अकीदतमंदों ने स्थानीय कब्रिस्तानों का रुख किया, जहां उन्होंने अपने पूर्वजों (मरहूमों) की मगाफिरत के लिए फातिहा पढ़ी। इसके बाद घरों में पारंपरिक तौर पर कुर्बानी की रस्म अदा की गई और गोश्त का एक बड़ा हिस्सा गरीबों, जरूरतमंदों और रिश्तेदारों में तकसीम (वितरित) कर खुशियां बांटी गईं।

आपसी सौहार्द की मिसाल बना त्योहार, चप्पे-चप्पे पर रहा पहरा

त्योहार के दौरान प्रताप नगर क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहजीब का खूबसूरत नजारा देखने को मिला। विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े हिंदू-सिख भाइयों ने भी ईदगाहों के बाहर पहुंचकर मुस्लिम समाज के लोगों को गले लगाकर मुबारकबाद दी।

वहीं, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा। डीएसपी और थाना प्रभारियों की देखरेख में संवेदनशील चौराहों और ईदगाहों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा, जिससे नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकी। मस्जिदों के उलेमाओं ने अपने संदेश में साफ कहा कि यह त्योहार हमें अपनी सबसे अजीज चीज की कुर्बानी देने और इंसानियत के रास्ते पर चलकर मजलूमों की मदद करने की सीख देता है।

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