Electricity workers’ strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के साझा मंच हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। मोर्चा ने इस संबंध में शक्ति भवन स्थित हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (HVPNL) के चीफ इंजीनियर/एडमिन को पत्र भेजकर अपनी असमर्थता से अवगत कराया है। मोर्चा के अनुसार, प्रशासन की ओर से बैठक के लिए बहुत कम समय दिया गया।
इसके अलावा संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी अस्वस्थ हैं, जबकि अन्य पदाधिकारियों की पहले से तय जरूरी व्यस्तताएं हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए मोर्चा ने सर्वसम्मति से बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला लिया। HVPNL की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, ऊर्जा मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में यह बैठक 21 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सिविल सचिवालय में प्रस्तावित थी। बैठक का उद्देश्य बिजली कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना था, लेकिन मोर्चा के शामिल नहीं होने के फैसले से प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी।
गुरुग्राम-नूंह में समानांतर लाइसेंस देने का विरोध
बिजली कर्मचारी और इंजीनियर गुरुग्राम तथा नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली लाइसेंस दिए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस फैसले को जन-विरोधी और कर्मचारी-विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। मोर्चा का आरोप है कि प्रदेश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को नुकसान पहुंच सकता है। संगठन का कहना है कि इस फैसले से सरकारी बिजली निगम की आर्थिक स्थिति और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, ये मोर्चा की ओर से उठाई गई आपत्तियां और आरोप हैं। इसी मुद्दे को लेकर मोर्चा ने 22, 23 और 24 अक्टूबर को तीन दिन की पूर्ण हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया है। मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक में शामिल होने से इनकार करने के बावजूद संगठन ने हड़ताल के कार्यक्रम में बदलाव की कोई घोषणा नहीं की है। ऐसे में बिजली सेवाओं और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।
सरकार से कर्मचारियों के हित में तत्काल फैसले की मांग
HVPNL के चीफ इंजीनियर/एडमिन को भेजे पत्र में संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बिजली क्षेत्र के सार्वजनिक हितों, प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति और हजारों कर्मचारियों व अभियंताओं के भविष्य का मुद्दा उठाया है। मोर्चा ने सरकार से अपनी मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। संगठन का कहना है कि बिजली व्यवस्था से जुड़े फैसलों में सार्वजनिक क्षेत्र और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। फिलहाल, मोर्चा 22 से 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल पर कायम है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच आगे वार्ता की कोई नई तारीख तय होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन को लेकर होने वाले फैसले अहम रहेंगे।

