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Faridabad Agra Canal Dispute: फरीदाबाद में आगरा नहर किनारे दीवार निर्माण का भारी विरोध, 9 लाख लोगों के रास्ते बंद होने का डर

AAmandeep Singh
फरीदाबाद में आगरा नहर किनारे दीवार निर्माण का भारी विरोध, 9 लाख लोगों के रास्ते बंद होने का डर
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फरीदाबाद। फरीदाबाद की लाइफलाइन मानी जाने वाली आगरा नहर इन दिनों विवादों के केंद्र में है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा पल्ला से खेड़ीपुल तक नहर के किनारे सुरक्षा दीवार (Boundry Wall) खड़ी करने की कवायद शुरू की गई है, जिसने स्थानीय लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। निवासियों का आरोप है कि यदि यह दीवार बनकर तैयार हो गई, तो वर्षों पुराने वे रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे, जिनका इस्तेमाल बच्चे स्कूल जाने और बुजुर्ग अस्पताल पहुंचने के लिए करते हैं। विवाद इतना गहरा गया है कि अब लोग सड़कों पर उतरने और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर चुके हैं।

“नहर से पुराने हमारे गांव, अब क्यों उजाड़ रहे?”

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इस विरोध की अगुवाई कर रहे पूर्व पार्षद देवेंद्र पहलवान ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि आगरा नहर का निर्माण अंग्रेजों ने 1836 में कराया था, जबकि यहां के कई गांव 14वीं और 15वीं शताब्दी से बसे हुए हैं। उनका तर्क है कि जब हमारे पूर्वज यहां नहर से पहले से रह रहे हैं, तो अब विकास के नाम पर हमारे रास्ते कैसे छीने जा सकते हैं? स्थानीय लोगों का दावा है कि इस निर्माण से करीब 8 से 9 लाख की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित होगी। इमरजेंसी के वक्त एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का कॉलोनियों में प्रवेश करना नामुमकिन हो जाएगा।

घरों पर ‘निशान’ और फोरलेन की मांग

हरकेश कॉलोनी के निवासियों में डर का माहौल है। लोगों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के कर्मचारी अब घरों पर निशान लगा रहे हैं, जबकि दशकों पहले पैमाइश के वक्त इसी जमीन को सुरक्षित बताया गया था। वहीं, इलाके के युवाओं का मानना है कि बाउंड्री वॉल बनाना समस्या का समाधान नहीं है। लोकेश बैसला जैसे युवाओं का सुझाव है कि सरकार को यहां दीवार खड़ी करने के बजाय फोरलेन सड़क बनानी चाहिए। इससे न केवल अतिक्रमण रुकेगा, बल्कि इलाके की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

मंत्री का आश्वासन और यूपी विभाग की दलील

बढ़ते जन-आक्रोश के बीच स्थानीय प्रतिनिधि केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर से मिले। गुर्जर ने साफ किया कि वह जनता के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। उन्होंने 12 तारीख को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई है। दूसरी ओर, यूपी सिंचाई विभाग के एसडीओ ए.के. जैन का कहना है कि विभाग अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए यह बाउंड्री बना रहा है और उनका उद्देश्य पुराने रास्तों को बंद करना नहीं है। हालांकि, जमीन पर लग रहे निशानों और बंद होती गलियों ने विभाग के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।

रविवार को महापंचायत: आंदोलन की बढ़ेगी तपिश

प्रशासनिक आश्वासनों के बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आगामी रविवार को फरीदाबाद में एक बड़ी महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें दर्जनों गांवों और कॉलोनियों के लोग शामिल होंगे। इस पंचायत में तय होगा कि यदि सरकार और विभाग ने निर्माण कार्य में बदलाव नहीं किया, तो आंदोलन का स्वरूप क्या होगा। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर गलियां बंद हुईं, तो वे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दरबार से लेकर हाई कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगे।

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