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Faridabad Property Tax News: नगर निगम की बड़ी स्ट्राइक: फरीदाबाद के 61 मैरिज पैलेस सील, 1000 शादियों के आयोजन पर लटकी तलवार

AAmandeep Singh
नगर निगम की बड़ी स्ट्राइक: फरीदाबाद के 61 मैरिज पैलेस सील, 1000 शादियों के आयोजन पर लटकी तलवार
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फरीदाबाद। फरीदाबाद के उन हजारों परिवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिनके घरों में अप्रैल महीने में शहनाइयां बजने वाली हैं। नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों के खिलाफ अपना हंटर चला दिया है। शहर के 131 मैरिज पैलेस और बैंक्वेट हॉलों को अंतिम नोटिस थमा दिया गया है। निगम की इस सख्ती का सीधा असर उन 1000 से ज्यादा शादियों पर पड़ने वाला है, जिनकी बुकिंग महीनों पहले हो चुकी है। अगर संचालकों ने तुरंत टैक्स जमा नहीं किया, तो बीच सीजन में इन हॉलों पर ताले लटकना तय है।

61 पर पहले ही जड़ा ताला, एनआईटी जोन में सबसे बुरा हाल

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नगर निगम की टीमें इस बार आर-पार के मूड में हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 61 मैरिज गार्डन और हॉल सील किए जा चुके हैं, जिनसे करीब 3 करोड़ रुपये की वसूली होनी है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति एनआईटी जोन-11 की है, जहां महज 35 यूनिट्स पर ही 2.67 करोड़ रुपये का टैक्स लंबित है। ओल्ड फरीदाबाद के जोन-1 और जोन-2 में भी दर्जनों ऐसे मैरिज पैलेस हैं, जिन्होंने सालों से सरकारी खजाने में फूटी कौड़ी जमा नहीं की है।

संचालकों की जिद और जनता की मुसीबत

हैरानी की बात यह है कि बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद कई बड़े संचालक टैक्स भरने से कतरा रहे हैं। निगम कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने कड़े लहजे में कहा है कि कार्रवाई नियमानुसार नोटिस देने के बाद ही की जा रही है। फील्ड में तैनात टीमें एक-एक बकायेदार की पहचान कर रही हैं। लेकिन इस पूरी रस्साकशी में वह आम आदमी पिस रहा है, जिसने अपनी जीवन भर की कमाई बच्चों की शादी के लिए इन हॉलों में एडवांस के तौर पर जमा करा दी है। अगर हॉल सील होते हैं, तो ऐन वक्त पर दूसरा इंतजाम करना नामुमकिन जैसा होगा।

अवैध निर्माण पर भी चला पीला पंजा

मैरिज पैलेस पर कार्रवाई के साथ-साथ निगम प्रशासन अवैध निर्माणों को लेकर भी सख्त है। शहर के विभिन्न इलाकों में बिना नक्शा पास कराए बनाई गई दुकानों और घरों को ध्वस्त करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। प्रशासन के इस दोहरे वार से पूरे शहर के प्रॉपर्टी मालिकों और कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। फिलहाल, सबकी नजरें उन 131 मैरिज पैलेस संचालकों पर टिकी हैं कि क्या वे समय रहते टैक्स भरकर हजारों शादियों को ‘बेघर’ होने से बचा पाएंगे।

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