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Faridabad Brahmin Sabha: फरीदाबाद ब्राह्मण सभा का बड़ा फैसला: शादियों में डीजे और दहेज की नुमाइश पर लगी रोक

AAmandeep Singh
फरीदाबाद ब्राह्मण सभा का बड़ा फैसला: शादियों में डीजे और दहेज की नुमाइश पर लगी रोक
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फरीदाबाद। फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में आयोजित ब्राह्मण सभा की महापंचायत ने समाज के बदलते स्वरूप और उसमें घर कर गई कुरीतियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सभा के अध्यक्ष बृजमोहन बातिश की अगुवाई में हुई इस बैठक में समाज के प्रबुद्ध लोगों ने एक स्वर में कहा कि आज उत्सव और शादियाँ खुशियों का माध्यम कम और आर्थिक बर्बादी का कारण ज्यादा बन रही हैं। सभा ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज को अपनी सादगी और सिद्धांतों की ओर लौटना होगा ताकि समाज का हर वर्ग, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार, सम्मान के साथ अपना जीवन निर्वाह कर सकें।

डीजे का शोर और दहेज की नुमाइश होगी बंद

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पंचायत में लिए गए फैसलों की फेहरिस्त काफी लंबी और असरदार है। सबसे अहम फैसला शादियों में बजने वाले कानफोड़ू डीजे और संगीत को लेकर लिया गया है, जिसे अब बंद करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, समाज में ‘बड़प्पन’ दिखाने के लिए दी जाने वाली दहेज की सूची को सबके सामने पढ़ने की परंपरा को ‘कुरीति’ करार देते हुए इसे तत्काल बंद करने को कहा गया है। सभा का मानना है कि उपहार देना व्यक्तिगत मामला हो सकता है, लेकिन उसका सार्वजनिक प्रदर्शन दूसरे परिवारों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बनाता है।

चादर प्रथा और ब्रह्मभोज पर भी चली कैंची

सिर्फ खुशियों के मौके ही नहीं, बल्कि गम के समय होने वाली रस्मों पर भी पंचायत ने कड़ा रुख अपनाया है। मृत्यु के बाद दी जाने वाली ‘चादर’ और भारी-भरकम ‘ब्रह्मभोज’ जैसी परंपराओं को सीमित करने या बंद करने का प्रस्ताव रखा गया है। बृजमोहन बातिश ने कहा कि आज लोग समाज में अपनी साख बचाने के लिए अपनी जमा-पूंजी और संपत्ति तक लुटा रहे हैं, जिससे उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने जोर दिया कि ब्राह्मण समाज का मूल स्वभाव त्याग और सादगी है, न कि कर्ज लेकर प्रदर्शन करना।

किसी से बैर नहीं बस अपना सुधार”: बातिश की दोटूक

मीडिया से रूबरू होते हुए सभा के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य किसी अन्य जाति या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद केवल अपने समाज को भीतर से मजबूत करना है। आज आम आदमी के लिए अपने ही समाज की होड़ में टिकना मुश्किल हो गया है। हम सबके साथ प्रेम से रहना चाहते हैं, लेकिन जो रीतियां अब कुरीतियों का रूप ले चुकी हैं, उन्हें हटाना अनिवार्य है।” पंचायत ने सभी मौजूद लोगों से अपील की है कि वे इन फैसलों को अपने घरों से शुरू करें ताकि एक स्वस्थ और मितव्ययी समाज की स्थापना हो सके।

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