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Faridabad DEO Reel Ban: हरियाणा के स्कूलों में रील बनाने पर बैन: फरीदाबाद DEO ने जारी किए सख्त आदेश, मीम बनाने पर भी रोक

AAmandeep Singh
हरियाणा के स्कूलों में रील बनाने पर बैन: फरीदाबाद DEO ने जारी किए सख्त आदेश, मीम बनाने पर भी रोक
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फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों और छात्रों के लिए स्मार्टफोन पर रील बनाना महंगा पड़ सकता है। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर क्लासरूम के भीतर फिल्मी गानों पर थिरकने और मीम बनाने के कई वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने एक पत्र जारी कर साफ कर दिया है कि स्कूल ‘शिक्षा का मंदिर’ हैं, न कि मनोरंजन का अड्डा। विभाग का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल अनुशासन भंग हो रहा है, बल्कि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

टीचर और वर्कर भी रडार पर, अनुशासन का पाठ पढ़ाएगा विभाग

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जारी किए गए आदेश में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि केवल छात्र ही नहीं, बल्कि कुछ शिक्षक और अन्य कर्मचारी भी रील और मीम बनाने में मशगूल पाए गए हैं। DEO कार्यालय की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल के निर्धारित समय के दौरान किसी भी प्रकार का एंटरटेनमेंट वीडियो शूट करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। पत्र में चेतावनी दी गई है कि स्कूल की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

अनुमति के बिना कैमरा ऑन किया तो खैर नहीं

हालांकि, विभाग ने नवाचार और रचनात्मकता के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। आदेश में यह प्रावधान रखा गया है कि यदि कोई स्कूल किसी विशेष शैक्षणिक विषय, सांस्कृतिक कार्यक्रम या सामाजिक जागरूकता अभियान पर वीडियो बनाना चाहता है, तो उसे एक तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके लिए पहले संबंधित उच्चाधिकारियों से लिखित अनुमति लेनी होगी और पूरा फिल्मांकन एक जिम्मेदार शिक्षक की निगरानी में ही संपन्न होगा।

सोशल मीडिया की सनक पर लगाम लगाने की कोशिश

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया की लत ने स्कूलों के माहौल को काफी हद तक प्रभावित किया है। कई बार रील बनाने के चक्कर में क्लासरूम की गोपनीयता और छात्रों की निजिटी (Privacy) भी दांव पर लग जाती है। फरीदाबाद प्रशासन का यह कदम प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि इस आदेश के बाद स्कूलों के भीतर ‘डिजिटल अनुशासन’ कितनी कड़ाई से लागू हो पाता है।

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