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Faridabad Electricity Workers Protest: भारी पुलिस बल के बीच बिजली कर्मियों का प्रदर्शन, ठेका प्रथा और वेतन विसंगति पर कड़ा रोष

GGaganpreet Kaur
भारी पुलिस बल के बीच बिजली कर्मियों का प्रदर्शन, ठेका प्रथा और वेतन विसंगति पर कड़ा रोष
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फरीदाबाद। फरीदाबाद में बिजली विभाग की मशीनरी केवल ट्रांसफॉर्मरों के बोझ से ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की कमी से भी कराह रही है। सर्व कर्मचारी संघ के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में वक्ताओं ने साफ किया कि विभाग में स्वीकृत पदों की तुलना में स्टाफ न के बराबर है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि एक ओर जहां शहर का विस्तार हो रहा है और उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर रिटायर हो रहे कर्मचारियों की जगह नई भर्तियां नहीं की जा रही हैं। इसका सीधा असर मौजूदा स्टाफ की सेहत और सुरक्षा पर पड़ रहा है।

“न पेंशन है, न सुरक्षा, बस काम का दबाव है”

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हाथों में मांग पत्र और बैनर लिए बिजली कर्मियों ने सरकार की ‘ठेका प्रथा’ नीति पर भी कड़ा प्रहार किया। कर्मचारियों का कहना है कि समान काम करने के बावजूद कच्चे और पक्के कर्मचारियों के वेतन में जमीन-आसमान का अंतर है। इसके अलावा, पुरानी पेंशन बहाली (OPS) की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठी। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा उपकरणों के अभाव में आए दिन लाइनमैन और तकनीकी स्टाफ हादसों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।

ज्ञापन का दौर खत्म, अब आर-पार की लड़ाई

यूनियन के कद्दावर नेता भूप सिंह कौशिक ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, “हम कोई आज पहली बार सड़क पर नहीं उतरे हैं। अधिकारियों की मेज पर ज्ञापनों का ढेर लग चुका है, लेकिन सरकार कुंभकर्णी नींद सोई हुई है। अब बर्दाश्त की हद पार हो चुकी है।” कौशिक ने दोटूक शब्दों में कहा कि अब वार्ताओं का दौर बीत गया है, अगर प्रशासन ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए तो यह आंदोलन जिला मुख्यालय से निकलकर प्रदेश स्तर पर उग्र रूप धारण करेगा।

प्रशासन की बढ़ी धड़कनें

प्रदर्शन के दौरान बिजली निगम के दफ्तरों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। कर्मचारियों के उग्र तेवरों ने विभागीय अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है तो भीषण गर्मी के इस मौसम में शहर की बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल, यूनियन ने अपना मांग पत्र उच्च अधिकारियों को सौंप दिया है और अब गेंद सरकार के पाले में है।

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