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Faridabad news: 400 साल पुरानी परंपरा, रक्षाबंधन पर ओल्ड फरीदाबाद में सजेगा ऐतिहासिक पंखा मेला, 27 झांकियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र

GGaganpreet Kaur
Faridabad news: 400 साल पुरानी परंपरा, रक्षाबंधन पर ओल्ड फरीदाबाद में सजेगा ऐतिहासिक पंखा मेला, 27 झांकियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र

400 साल पुरानी परंपरा, रक्षाबंधन पर ओल्ड फरीदाबाद में सजेगा ऐतिहासिक पंखा मेला

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Faridabad news: फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक ‘पंखा मेला’ इस बार भी रक्षाबंधन के पावन अवसर पर ओल्ड फरीदाबाद में पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। करीब चार शताब्दियों पुरानी इस पावन परंपरा को सकुशल संपन्न कराने के लिए पंखा मेला कमेटी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में ओल्ड फरीदाबाद स्थित प्रसिद्ध मां पथवारी मंदिर परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के तमाम समाजों और बिरादरियों के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए पंखा मेला कमेटी के प्रधान बिल्ला पहलवान उर्फ जितेश पाराशर ने बताया कि मेले को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष मेले की शोभायात्रा में विभिन्न समाजों की ओर से तैयार 27 भव्य झांकियां शामिल की जाएंगी, जो शहर की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करेंगी।

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महामारी के प्रकोप से मुक्ति के लिए शुरू हुआ था अनुष्ठान

ओल्ड फरीदाबाद के बुजुर्गों और इतिहास के जानकारों के मुताबिक, इस पंखा मेले का इतिहास लगभग 300 से 400 वर्ष पुराना है। प्राचीन समय में जब फरीदाबाद क्षेत्र में एक भीषण महामारी फैल गई थी और जन-धन की भारी हानि हो रही थी, तब तत्कालीन नगरवासियों ने शहर को इस आपदा से बचाने और सुख-शांति की बहाली के लिए नगर देवी मां पथवारी के चरणों में मन्नत मांगकर पंखा चढ़ाने का संकल्प लिया था।

मां पथवारी की कृपा से जब महामारी का प्रकोप शांत हुआ, तभी से हर साल रक्षाबंधन के दिन पंखा मेला आयोजित करने की परंपरा अनवरत चली आ रही है। समय के साथ-साथ यह मेला न केवल फरीदाबाद की पहचान बन गया, बल्कि लोक आस्था का सबसे बड़ा केंद्र भी साबित हुआ।

हरिद्वार का मुस्लिम परिवार बनाता है पंखा, सांप्रदायिक सौहार्द की है अनूठी मिसाल

पंखा मेले की सबसे खूबसूरत और अनूठी खासियत इसका सांप्रदायिक सौहार्द है। मेले में मां पथवारी को अर्पित किया जाने वाला विशेष पंखा हर साल धर्मनगरी हरिद्वार से बनवाकर लाया जाता है। खास बात यह है कि इस पवित्र पंखे को वहां का एक मुस्लिम परिवार पुस्तैनी हुनर के साथ पूरी श्रद्धा से तैयार करता है।

मेले के दिन इस पंखे को पूरे गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ उठाया जाता है। सबसे पहले पंखे को शहर में स्थित ‘चार पीरों’ की दरगाह की परिक्रमा कराई जाती है, जिसके बाद पूरे नगर में भ्रमण कराते हुए फरीदाबाद की कुलदेवी मां पथवारी के चरणों में समर्पित कर दिया जाता है।

कमेटी के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की एक मिसाल भी है। सर्वसमाज के सहयोग से इस बार भी मेले को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

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