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Rajni Sharma Powerlifter Faridabad: फरीदाबाद की 'सुपर मॉम': 106 किलो वजन को हराकर जीता पावरलिफ्टिंग में गोल्ड, अब विदेश में दिखाएंगी दम

AAmandeep Singh
फरीदाबाद की 'सुपर मॉम': 106 किलो वजन को हराकर जीता पावरलिफ्टिंग में गोल्ड, अब विदेश में दिखाएंगी दम
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फरीदाबाद। रजनी शर्मा की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। कुछ समय पहले तक रजनी एक साधारण गृहणी थीं, जो बढ़ते वजन और खराब होती सेहत से परेशान थीं। उनका वजन 106 किलो तक पहुंच चुका था, जिससे रोजमर्रा के काम करना भी दूभर हो रहा था। डॉक्टर की सलाह और खुद को फिट रखने की जिद ने उन्हें जिम तक पहुंचाया। लेकिन किसे पता था कि ट्रेडमिल पर शुरू हुआ यह सफर ‘डेडलिफ्ट’ और ‘स्कवाट्स’ के भारी वजन तक पहुंच जाएगा।

शादी के 21 साल बाद बदली जिंदगी की पटरी

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रजनी बताती हैं, “शादी के 21 साल बाद जब मैंने जिम जॉइन किया, तो मकसद सिर्फ वजन कम करना था। वहां अभ्यास के दौरान कोच और साथियों ने महसूस किया कि मेरे अंदर वजन उठाने की स्वाभाविक क्षमता है। शुरुआत में झिझक हुई, क्योंकि उम्र के इस पड़ाव पर समाज और परिवार की प्रतिक्रिया का डर था, लेकिन मेरे अपनों ने मेरा साथ दिया।” रजनी ने जिम में पसीना बहाया और देखते ही देखते 25 किलो वजन घटाकर खुद को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म कर लिया।

रसोई से जिम तक का कठिन सफर

एक गृहणी के लिए एथलीट बनना आसान नहीं होता। रजनी का दिन सुबह जल्दी शुरू होता है, जहाँ वे बच्चों का टिफिन तैयार करने और घर के काम निपटाने के बाद घंटों जिम में लोहे से दोस्ती करती हैं। उनकी मेहनत का फल तब मिला जब उन्होंने पावरलिफ्टिंग की राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंका दिया। आज फरीदाबाद के खेल जगत में रजनी एक मिसाल बन चुकी हैं।

अब निगाहें ‘सात समंदर पार’ पर

गोल्ड मेडल जीतने के बाद रजनी के हौसले सातवें आसमान पर हैं। उनका कहना है कि उम्र कभी भी आपकी प्रतिभा के आड़े नहीं आ सकती, बशर्ते आपके इरादे फौलादी हों। रजनी अब अपनी तकनीक और ताकत पर और भी बारीकी से काम कर रही हैं। उनका एकमात्र सपना अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना और पदक जीतना है।

महिलाओं के लिए संदेश: ‘खुद को मत भूलिए’

रजनी शर्मा उन करोड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो घर की चारदीवारी में खुद को सीमित कर लेती हैं। वे कहती हैं, “अक्सर महिलाएं 35-40 की उम्र के बाद मान लेती हैं कि अब उनकी जिंदगी बच्चों और परिवार के लिए ही है। मैं उनसे कहना चाहती हूं कि अपनी सेहत और शौक के लिए समय निकालें। अगर मैं 40 साल की उम्र में 106 किलो वजन के साथ शुरुआत कर सकती हूं, तो कोई भी कुछ भी कर सकता है।

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