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Faridabad STP Upgrade: फरीदाबाद के लिए 85 करोड़ मंजूर: अब सीवेज के गंदे पानी से बुझेगी उद्योगों और पार्कों की प्यास

AAmandeep Singh
फरीदाबाद के लिए 85 करोड़ मंजूर: अब सीवेज के गंदे पानी से बुझेगी उद्योगों और पार्कों की प्यास
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फरीदाबाद। फरीदाबाद की बढ़ती आबादी और उद्योगों के दबाव के बीच सीवेज मैनेजमेंट एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। इसी समस्या के स्थाई समाधान के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने फरीदाबाद के तीन बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को आधुनिक तकनीक से लैस करने का फैसला लिया है। सरकार ने इसके लिए 85 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की है। इस प्रोजेक्ट का सीधा फायदा प्रतापगढ़, मिर्जापुर और बादशाहपुर जैसे इलाकों को मिलेगा, जहां पुराने पड़ चुके सिस्टम की वजह से अक्सर जल शोधन में दिक्कतें आती थीं।

FMDA संभालेगा जिम्मा, 205 MLD पानी होगा साफ

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इस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (FMDA) को दी गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रतापगढ़ में 90 MLD, मिर्जापुर में 70 MLD और बादशाहपुर में 45 MLD क्षमता वाले प्लांट को अपग्रेड किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इन तीनों प्लांट की कुल शोधन क्षमता 205 MLD हो जाएगी। इससे शहर के सीवेज का एक बड़ा हिस्सा सीधे नदियों या नालों में गिरने के बजाय पूरी तरह फिल्टर होकर बाहर निकलेगा।

ओजोनेशन और यूवी तकनीक से पानी बनेगा ‘अनमोल’

इस बार सरकार सिर्फ पुराने फिल्टर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्लांट में ग्लोबल स्टैंडर्ड की तकनीक अपनाई जा रही है। इन एसटीपी में ओजोनेशन, यूवी डिसइंफेक्शन और एडवांस फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाया जाएगा। इस हाईटेक प्रक्रिया के बाद पानी से हानिकारक बैक्टीरिया और गंदगी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। साथ ही, बेहतर स्लज मैनेजमेंट (कीचड़ प्रबंधन) के जरिए कचरे का निपटान भी पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किया जा सकेगा।

फैक्ट्रियों और पार्कों में होगा शोधित पानी का इस्तेमाल

इस निवेश के पीछे सरकार की सोच सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के जल संकट को टालना भी है। मुख्यमंत्री का विजन है कि पीने के साफ पानी को उद्योगों या सिंचाई में बर्बाद न किया जाए। अपग्रेडेशन के बाद इन प्लांट से निकलने वाले पानी का उपयोग औद्योगिक इकाइयों, कंस्ट्रक्शन साइट्स, पार्कों के रखरखाव और खेतों की सिंचाई में किया जाएगा। यह पहल ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भूजल बचाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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