September 23, 2026

Farmers Protest: शाहाबाद हाईवे पर किसानों का पक्का डेरा, धान खरीद पर अड़े चढूनी, टिकैत गुट ने दिया समर्थन

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Haryana Paddy Procurement Protest

शाहाबाद हाईवे पर किसानों का पक्का डेरा, धान खरीद पर अड़े चढूनी

Farmers Protest: हरियाणा की अनाज मंडियों में धान की आवक शुरू होते ही सरकारी खरीद की तारीख को लेकर गतिरोध चरम पर पहुंच गया है। कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में किसान और जिला प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच दो अलग-अलग दौर की वार्ता आयोजित की गई, लेकिन दोनों ही बेनतीजा खत्म हुईं। प्रशासन ने नमी के मानकों और केंद्र की मंजूरी का हवाला देते हुए 25 से 26 सितंबर से खरीद शुरू करने का फॉर्मूला रखा, जिसे भारतीय किसान यूनियन (Gurnam Singh Chaduni ) ने सिरे से खारिज कर दिया।

वार्ता टूटने के बाद गुस्साए किसानों ने शाहाबाद-बराड़ा स्टेट हाईवे-4 पर ही अपना पक्का डेरा डाल दिया। मंगलवार रात सड़क पर ही लंगर पकाया गया और उमस भरी गर्मी से निपटने के लिए हाईवे किनारे बड़े-बड़े कूलर लगा दिए गए। कोई दरी बिछाकर सड़क पर सोया तो किसी ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली को ही रैनबसेरा बना लिया। बीकेयू प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने स्पष्ट किया है कि जब मंडियों में ढेरी लग चुकी है, तो किसान कई दिनों का इंतजार करके अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर क्यों हो?

महापंचायत से तय होगी आर-पार की रणनीति: टिकैत गुट की एंट्री से गरमाई राजनीति

आंदोलन को धार देने के लिए आज शाहाबाद में एक बड़ी किसान महापंचायत बुलाई गई है। इसमें मंगलवार को पुलिस के साथ हुए टकराव, आंसू गैस के गोलों के इस्तेमाल और किसान नेताओं की धरपकड़ पर कड़ा संज्ञान लिया जाएगा। इस लड़ाई में अब भाकियू टिकैत गुट की एंट्री से आंदोलन को बड़ा बल मिला है। टिकैत गुट के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कुरुक्षेत्र में किसानों पर हुए पुलिसिया बल प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए अपने सभी कार्यकर्ताओं को शाहाबाद पहुंचने का फरमान सुनाया है।

राष्ट्रीय किसान नेता राकेश टिकैत ने भी कुरुक्षेत्र के घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। टिकैत ने सवाल उठाया कि अपनी मेहनत की फसल की सरकारी खरीद मांगना कौन सा गुनाह है? उन्होंने कहा कि वॉटर कैनन और लाठीचार्ज सरकार की किसान विरोधी मंशा का सबूत हैं। टिकैत ने हरियाणा के तमाम किसान संगठनों से मतभेद भुलाकर एकजुट होने और शाहाबाद महापंचायत को ऐतिहासिक बनाने की अपील की है, जिससे राज्य सरकार पर चौतरफा दबाव बन गया है।

पोर्टल वेरिफिकेशन और केंद्र की मंजूरी: आखिर कहाँ फंसा है पेंच?

इस पूरे विवाद की जड़ में सरकारी व्यवस्था और पोर्टल वेरिफिकेशन की देरी है। किसान नेता चढूनी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि धान की खरीद के लिए अनिवार्य मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल की वेरिफिकेशन 31 जुलाई को ही बंद कर दी गई थी। अब जब किसानों ने सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराया, तब जाकर पोर्टल खोला गया है। चढूनी का दावा है कि इतने कम समय में खेतों का भौतिक सत्यापन संभव नहीं है, जिससे वास्तविक किसानों के हक पर डाका पड़ सकता है। हालांकि प्रशासनिक हलकों ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

दूसरी तरफ, कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि राज्य सरकार किसानों के हित में जल्द खरीद शुरू कराना चाहती है। इसके लिए केंद्र सरकार को नमी के मानकों में छूट और खरीद शेड्यूलिंग का विस्तृत प्रस्ताव भेजा जा चुका है। केंद्र से मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब भी भेजा गया है। डीसी के मुताबिक, केंद्र से हरी झंडी मिलते ही तुरंत खरीद शुरू कर दी जाएगी। यदि किसी कारणवश दिल्ली से मंजूरी में विलंब होता है, तब भी राज्य सरकार अपने स्तर पर 25 सितंबर के आसपास व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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