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Firozpur News: मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा चार लेन दोराहा रेलवे ओवर ब्रिज- रवनीत सिंह बिट्टू

VVinita Kohli
Firozpur News: मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा चार लेन दोराहा रेलवे ओवर ब्रिज- रवनीत सिंह बिट्टू
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फिरोजपुर: लेवल क्रॉसिंग संख्या 164एबी, दोराहा पर चार लेन रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण मालवा क्षेत्र, पंजाब की राजधानी तथा आसपास के जिलों के बीच संपर्क को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक बुनियादी ढांचा परियोजना साबित होगा। यह बात केंद्रीय राज्य मंत्री (रेलवे एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) रवनीत सिंह बिट्टू ने कही। आज के कार्यक्रम में विनोद भाटिया, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला,    जीव रंजन राजू, चीफ इंजीनियर (रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट) एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहें।

मीडिया से बातचीत करते हुए, चार लेन आरओबी का शिलान्यास करने के बाद मंत्री ने बताया कि लगभग ₹70.55 करोड़ की लागत से बनने वाली यह परियोजना अगले एक वर्ष के भीतर पूर्ण कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि अब इस कार्य को युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा और इसे जल्द से जल्द आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। पिछले लगभग 12 वर्षों से इस लेवल क्रॉसिंग पर लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था, जिससे अब उन्हें राहत मिलेगी।

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उन्होंने बताया कि दोराहा का यह लेवल क्रॉसिंग रूपनगर से लुधियाना को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर स्थित है, जो पंजाब की राजधानी और पूरे मालवा क्षेत्र के बीच एक अहम कड़ी का काम करती है। मंत्री ने कहा कि प्रतिदिन लगभग 190 ट्रेनें इस क्रॉसिंग से गुजरती हैं और 3,000 से अधिक वाहन यहां से होकर निकलते हैं। रेल यातायात के कारण बार-बार फाटक बंद होने से जाम, लंबा इंतजार और आम यात्रियों, व्यापारियों तथा परिवहनकर्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आरओबी के निर्माण से ये समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।

रवनीत सिंह ने इस परियोजना को स्वीकृति देने के लिए माननीय प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की जनता के लिए एक बड़ी सौगात है। नया चार लेन आरओबी न केवल दैनिक आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि माल एवं सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित कर आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा।

पंजाब में चल रहे रेलवे बुनियादी ढांचा विकास कार्यों की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि राज्य में 166 स्थानों पर रेलवे ओवर ब्रिज , रेलवे अंडर ब्रिज  और लो हाइट सबवे  के कार्य ₹1,480.09 करोड़ की लागत से प्रगति पर हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में रेलवे अवसंरचना विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है और सरकार राज्य में रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण एवं विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आगे बताया कि पंजाब में रेलवे का वार्षिक बजट आवंटन 2009–2014 की अवधि की तुलना में आज लगभग 25 गुना बढ़कर ₹5,673 करोड़ हो गया है। वर्तमान में राज्य में ₹26,382 करोड़ के अवसंरचना कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास, सुरक्षा उन्नयन तथा क्षमता विस्तार से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत राज्य के 30 रेलवे स्टेशनों का ₹1,311 करोड़ की लागत से व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मंत्री ने दिल्ली और अंबाला के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी देने के लिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया। यह परियोजना अत्यधिक व्यस्त दिल्ली–जम्मू रेल कॉरिडोर को चौड़ा करने की व्यापक योजना का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को उत्तरी राज्यों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

 दिल्ली अंबाला खंड देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक है, जहां यात्री और माल यातायात दोनों का भारी दबाव है। तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण से लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, परिचालन दक्षता सुधरेगी और भीड़भाड़ में कमी आएगी। 194 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹5,983 करोड़ है और इसे चार वर्षों में पूरा किया जाएगा। यह परियोजना हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों तथा दिल्ली के सेंट्रल, नॉर्थ वेस्ट और नॉर्थ दिल्ली क्षेत्रों से होकर गुजरेगी।

क्षमता वृद्धि से अतिरिक्त यात्री एवं मालगाड़ियों का संचालन संभव होगा, जिससे समयपालन और सेवा की विश्वसनीयता में सुधार आएगा। यह कॉरिडोर रोपड़, पानीपत और राजपुरा स्थित ताप विद्युत संयंत्रों सहित कृषि गोदामों और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ता है। बेहतर माल परिवहन से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्नत कॉरिडोर से प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों जैसे माता वैष्णो देवी, कटरा, श्रीनगर, जम्मू, शिमला तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जिससे पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, यह परियोजना प्रतिवर्ष लगभग 24.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल परिवहन को संभव बनाएगी, जिससे मौजूदा ढांचे पर दबाव कम होगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रतिवर्ष लगभग 43 करोड़ किलोग्राम  उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 1.7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। अनुमानित रूप से ₹952 करोड़ प्रति वर्ष की लॉजिस्टिक लागत बचत होगी, जिससे आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। निर्माण चरण के दौरान लगभग 132 लाख मानव-दिवस के रोजगार सृजित होने की संभावना है।

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