GJU Hisar Protest: गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU Hisar news) हिसार में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे शोधार्थियों का आंदोलन पांचवें दिन भी जारी रहा। इस बीच, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र संजू की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तुरंत उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
संजू के साथ-साथ छात्र विकास भनभौरी भी 8 अक्टूबर से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन और शोधार्थियों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी ठोस समाधान पर सहमति न बनने के कारण छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है।
रात के समय हुई प्रशासनिक वार्ताओं के बेनतीजा रहने के बाद छात्र अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर डटे हुए हैं। रिसर्च स्कॉलर्स का मुख्य रोष वर्ष 2022 से 2025 तक की लंबित फेलोशिप (GJU fellowship dispute) का भुगतान न होने को लेकर है। इसके अलावा, छात्रों की मांग है कि उनसे वसूली जा रही फीस वर्ष 2020 के प्रॉस्पेक्टस के अनुसार निर्धारित की जाए और मनमाने ढंग से बढ़ाई जा रही फीस पर रोक लगाई जाए। साथ ही, शोध कार्यों के लिए प्लेजरिज्म चेक की सुविधा और जरूरी आईडी समय पर उपलब्ध कराने की भी मांग की जा रही है।
कांग्रेस विधायकों ने बोला सरकार पर हमला, विधानसभा में मुद्दा उठाने का किया ऐलान
शोधार्थियों के इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। शुक्रवार को कांग्रेस के तीन विधायक—देविंदर हंस, जस्सी पेडवाड और नरेश सेलवाल—धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों की मांगों के प्रति पूर्ण एकजुटता दिखाई।
विधायक देवेंद्र हंस ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह सरकार पूरी तरह से तानाशाही रवैया अपना रही है और छात्रों का शोषण कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले छात्रों को सरकार की ओर से स्कॉलरशिप दी जाती थी, (Hisar university strike) जिसे इस सरकार ने बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों की इन मांगों को नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समक्ष रखा जाएगा और इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में जोर-शोर से उठाया जाएगा।
वहीं, विधायक जस्सी पेडवाड और उकलाना के विधायक नरेश सेलवाल ने भी प्रशासन को आड़े हाथों लिया। नरेश सेलवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का काम शिक्षा देना है, लेकिन आज दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि छात्रों को अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा।
प्रशासन ने बनाई कमेटी, समाधान के प्रयास जारी
बढ़ते दबाव के बीच विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार विजय कुमार ने बताया कि छात्रों की स्कॉलरशिप और फेलोशिप से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है। (Congress leaders GJU protest) यह कमेटी सभी बिंदुओं पर विचार कर जल्द ही निर्णय लेगी। हालांकि, जब तक लंबित मामलों का समयबद्ध और लिखित निपटारा नहीं होता, तब तक शोधार्थियों ने अपना धरना जारी रखने का ऐलान किया है। धरने को INSO, ABVP, NSUI, DSC, PSF और OBC छात्र संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।
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