हरियाणा। हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को एक बार फिर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। सिरसा से युवा और मुखर विधायक गोकुल सेतिया ने अब इस मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व को आड़े हाथों लिया है। सेतिया ने साफ लहजे में कहा कि जिन विधायकों ने चुनाव के दौरान पार्टी के साथ ‘खेला’ किया है, उनके खिलाफ केवल जांच नहीं बल्कि सीधी और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका इशारा उन पांच विधायकों की तरफ था जिन्होंने खुलेआम क्रॉस वोटिंग की और उन चार माननीयों की तरफ जिनके वोट तकनीकी कारणों से कैंसिल हो गए। सेतिया का मानना है कि अनुशासनहीनता को नजरअंदाज करना भविष्य में आत्मघाती साबित होगा।
“हाथ में पानी लेकर खाई थी कसम”: निष्ठा पर शक करने वालों को जवाब
पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों और खुद पर लग रहे आरोपों को खारिज करते हुए गोकुल सेतिया ने अपनी ईमानदारी का प्रमाण दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने “हाथ में पानी लेकर” यह संकल्प लिया था कि उनका वोट केवल कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को ही जाएगा और उन्होंने अपना वादा निभाया। उन्होंने चुनौती दी कि जिन भी विधायकों के वोट रद्द हुए हैं, उनके नाम जनता और कार्यकर्ताओं के सामने आने चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। सेतिया ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इन 4 ‘कैंसिल’ वोटों के पीछे की सच्चाई सामने नहीं आई और कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में गद्दारों की फेहरिस्त और लंबी हो सकती है।
मुख्यमंत्री की तारीफ पर सफाई: “सराहना अपनी जगह, पार्टी अपनी जगह”
अक्सर भाजपा के करीब होने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए सेतिया ने स्पष्ट किया कि उन्हें भाजपा की ओर से न तो कोई प्रलोभन दिया गया और न ही किसी तरह का दबाव बनाया गया। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की व्यक्तिगत तौर पर तारीफ करने से परहेज नहीं किया। सेतिया ने कहा कि मुख्यमंत्री की कार्यशैली की वह पहले भी सराहना करते थे और आगे भी करते रहेंगे, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह अपनी पार्टी के साथ गद्दारी करेंगे। वहीं, हथीन के विधायक मोहम्मद इसराइल द्वारा कांग्रेस से अगला चुनाव न लड़ने के बयान पर तंज कसते हुए सेतिया ने पूछा कि अगर मन बदल ही गया था, तो इतने समय तक पार्टी की बैठकों में शामिल होकर क्या कोरम पूरा कर रहे थे?
हाईकमान को अल्टीमेटम: अब नहीं तो कब?
सिरसा विधायक ने कांग्रेस हाईकमान से अपील की है कि अब समय हाथ से रेत की तरह फिसल रहा है। 5 विधायक पहले ही पाला बदल चुके हैं, ऐसे में अगर बाकी 4 संदेहास्पद चेहरों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन का मनोबल गिर जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाकर उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कराने की दिशा में भी कदम उठाने चाहिए। सेतिया के इस आक्रामक रुख ने चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के गलियारों में खलबली मचा दी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हुड्डा और हाईकमान इस ‘भीतरघात’ पर क्या एक्शन लेते हैं।

