राजस्थान में सूखे जैसे हालात पर गहलोत की चेतावनी, बोले- अभी से बनाएं आकस्मिक योजना
राजस्थान में सूखे जैसे हालात पर गहलोत की चेतावनी
Rajasthan News: राजस्थान में कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से तत्काल आकस्मिक योजना तैयार करने की मांग की है। जयपुर में रविवार को संवाददाताओं से बातचीत में गहलोत ने कहा कि अभी से हालात को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले महीनों में लोगों के लिए पेयजल और पशुओं के लिए चारे की समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है। गहलोत ने सरकार से प्रभावित इलाकों में पहले से राहत की तैयारी करने की अपील की। गहलोत ने कहा कि राजस्थान पहले भी सूखे की स्थिति का सामना कर चुका है। ऐसे में सरकार को अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उन इलाकों की पहचान करनी चाहिए, जहां आने वाले समय में पानी और चारे की ज्यादा जरूरत पड़ सकती है। उनका कहना था कि संकट बढ़ने के बाद इंतजाम करने के बजाय अभी से संसाधन और राहत व्यवस्था तैयार रखना ज्यादा जरूरी है।
गहलोत ने कहा कि अगर मौजूदा परिस्थितियों में समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले महीनों में लोगों और पशुओं के लिए पानी और चारे की समस्या विकराल हो सकती है। उन्होंने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पशुपालकों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने की मांग की। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में चारे की कमी का सीधा असर पशुपालकों पर पड़ सकता है। गहलोत ने इसी वजह से सरकार से राहत व्यवस्था को केवल कागजी योजना तक सीमित नहीं रखने और जरूरत वाले क्षेत्रों में समय रहते काम शुरू करने को कहा।
रोजगार गारंटी व्यवस्था को लेकर भी गहलोत ने उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान पहले भी सूखे का सामना कर चुका है, लेकिन पिछले वर्षों में ट्यूबवेल, हैंडपंप और रोजगार गारंटी कार्यक्रमों के कारण इसके प्रभाव को कम करने में मदद मिली। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से संकट के समय लोगों को आर्थिक सहारा मिलता है। गहलोत ने रोजगार गारंटी व्यवस्था में हुए बदलाव को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बदलावों के बाद लोगों को मांग के आधार पर काम मिलने का भरोसा पहले जैसा नहीं रहा है। उन्होंने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त राहत कार्य सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि ग्रामीण परिवारों को संकट के समय रोजगार और आय का सहारा मिल सके।
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से बाड़मेर में की गई घोषणा का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि घोषणा के तीन दिन बाद भी संबंधित आदेश जिला कलेक्टर तक नहीं पहुंचा है। गहलोत ने कहा कि सरकार की घोषणाओं का फायदा तभी मिलेगा, जब उनके आदेश समय पर प्रशासन और जमीन पर काम करने वाली मशीनरी तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रदेश के कुछ हिस्सों में बने हालात से प्रभावी तरीके से निपटना चाहती है तो उसे पेयजल, चारे और राहत कार्यों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेना होगा। उनके मुताबिक सिर्फ घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
गहलोत ने किसानों का कर्ज माफ करने की मांग की
सरकार को सुझाव देने के सवाल पर गहलोत ने किसानों के कृषि ऋण माफ करने की मांग रखी। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान करीब 14,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को भी राहत की जरूरत है। गहलोत का कहना है कि अगर किसी क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं तो उसका असर केवल फसल तक सीमित नहीं रहता। किसानों की आमदनी, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में राहत पैकेज में किसानों और पशुपालकों की जरूरतों को शामिल किया जाना चाहिए।
गहलोत ने बताया कि कांग्रेस के ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर के नेता प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इस दौरान यह देखा जाएगा कि राहत कार्य शुरू हुए हैं या नहीं, लोगों को मिलने वाले भुगतान समय पर हो रहे हैं या नहीं और प्रभावित इलाकों में चारे तथा पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर स्थिति की जानकारी मिलने के बाद यह भी पता चलेगा कि सरकार की घोषणाओं और राहत योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। कांग्रेस नेताओं के इन दौरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेने और सरकार के सामने संबंधित मुद्दे उठाने की बात कही गई है।
