Guava Plant Care: सर्दियों का मौसम आते ही बाजारों में लाल-सफेद और मीठे अमरूद की खुशबू हवा में घुलने लगती है। सेहत के लिहाज से विटामिन सी, फाइबर और पोटेशियम से भरपूर अमरूद न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है, बल्कि इसकी पत्तियाँ और फल दोनों ही ब्लड शुगर और पाचन जैसी समस्याओं में रामबाण माने जाते हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी घरों की छतों तक अमरूद के पौधे आसानी से लगाए जाते हैं। हालांकि, कई लोगों की यह आम शिकायत रहती है कि पौधा हरा-भरा तो रहता है, लेकिन उसपर फूल और फल नहीं आते। अगर आपके भी अमरूद के पौधे पर यही दिक्कत है, तो अक्टूबर के इस महीने में कुछ खास टिप्स अपनाकर आप इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते हैं।
सही वैरायटी और लगाने का सही तरीका
बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर आप अमरूद के पौधे से जल्दी और बंपर पैदावार चाहते हैं, तो कभी भी देसी पौधा न लगाएं। हमेशा ग्राफ्टेड पौधा ही चुनें, क्योंकि देसी पौधे को फल देने में पाँच से सात साल लग जाते हैं, जबकि ग्राफ्टेड पौधे डेढ़ से दो साल में ही फल देना शुरू कर देते हैं। नर्सरी से पौधे लाते समय इलाहाबाद सफेदा, लखनऊ 49 (सरदार), ताइवान पिंक या पंजाब पिंक जैसी उन्नत वैरायटी का चुनाव करें। पौधे को सीधे लाकर तुरंत गमले में न रोपें, बल्कि तीन-चार दिन उसे अन्य पौधों के पास रखकर स्थानीय वातावरण में ढलने दें। इसके बाद कम से कम 18 गुणा 18 इंच के गमले में उसकी रोपाई करें।
प्रूनिंग और गुड़ाई से बदलेगी पौधे की सेहत
अमरूद के पौधे में भरपूर पैदावार के लिए सितंबर-अक्टूबर के दौरान इसकी प्रूनिंग (कटाई-छंटाई) करना बहुत जरूरी है। यदि आप समय पर प्रूनिंग नहीं कर पाए हैं, तो अभी भी वक्त है कि सूखी और घनी टहनियों को छाँट लें, ताकि पौधे के हर हिस्से को पर्याप्त धूप मिल सके। इसके बाद गमले की मिट्टी की अच्छी तरह गुड़ाई करें। गुड़ाई करने के बाद मिट्टी को एक-दो दिन की धूप लगने दें और फिर उसमें पुरानी गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिला दें। खाद डालने के बाद पौधे में भरपूर मात्रा में पानी दें। गमले में हमेशा ऊपर से 3 से 4 इंच जगह खाली छोड़ें ताकि भविष्य में खाद और मिट्टी आसानी से डाली जा सके।
घरेलू नुस्खे: चावल के पानी से लेकर मट्ठे का कमाल
अमरूद के पौधे की ग्रोथ बढ़ाने और फलों को झड़ने से रोकने के लिए रसोई में मौजूद चीजें बेहद कारगर साबित होती हैं। पौधे में चावल या दाल धोने के बाद बचा हुआ पानी और 48 घंटे तक पानी में भिगोकर रखे गए केले के छिलकों का घोल डालने से बंपर फूल आते हैं। इसके अलावा, फ्रेश चायपत्ती या कॉफी पाउडर को पानी में मिलाकर जड़ों में डालने से प्राकृतिक खाद का काम होता है। यदि पौधे के फूल झड़ जाते हैं, तो 5-6 दिन पुराना छाछ (मट्ठा) लें और 100 ग्राम मट्ठे में आधा लीटर पानी मिलाकर पौधे पर स्प्रे करें। साथ ही, 50 ग्राम गुड़ और 40 ग्राम बेसन के घोल को गमले की मिट्टी में डालने से पॉलिनेशन बेहतर होता है और फल टिकने लगते हैं।
पीली पत्तियों की समस्या से ऐसे पाएँ छुटकारा
सर्दियों की शुरुआत में अक्सर अमरूद के पौधे की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं या उन पर काले धब्बे उभर आते हैं। ऐसी संक्रमित पत्तियों को तुरंत तोड़कर पौधे से दूर मिट्टी में दबा दें या जला दें। पौधे की चमक और पत्तियों की सेहत के लिए एक चम्मच एप्सम सॉल्ट और पोटाश ग्रेन्यूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद असरदार बातों का ध्यान रखकर अगर आप अपने अमरूद के पौधे की देखभाल करेंगे, तो एक ही पौधे से 30 से 35 किलो तक शानदार और मीठे अमरूद की पैदावार हासिल कर सकते हैं।
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