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Bandhwari Waste Plant Fire: गुरुग्राम बना 'कूड़ाग्राम': बंधवाड़ी प्लांट की आग ने रोकी सफाई व्यवस्था की रफ्तार

AAmandeep Singh
गुरुग्राम बना 'कूड़ाग्राम': बंधवाड़ी प्लांट की आग ने रोकी सफाई व्यवस्था की रफ्तार
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गुरुग्राम। गुरुग्राम और फरीदाबाद के कचरे का ‘कब्रिस्तान’ कहा जाने वाला बंधवाड़ी प्लांट एक बार फिर सुलग रहा है। कूड़े के विशाल पहाड़ों में लगी आग ने पूरी साइबर सिटी की फिजा को प्रदूषित कर दिया है। प्लांट से उठते जहरीले धुएं के कारण आसपास के गांवों और रिहायशी सोसायटियों में रहने वाले लोगों का दम घुटने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल प्लांट में नया कचरा डालने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है, जिसका सीधा और घातक असर अब शहर की गलियों में दिखने लगा है।

गाड़ियां फुल, डंपिंग यार्ड जाम: सफाई व्यवस्था का निकला दिवाला

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प्लांट में एंट्री बंद होने का असर यह हुआ है कि गुरुग्राम के तमाम प्राइमरी डंपिंग स्टेशन कूड़े से लबालब भर चुके हैं। घर-घर से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां (ECSL) खाली नहीं हो पा रही हैं, जिसके चलते वे यार्ड के बाहर कतारों में खड़ी हैं। आलम यह है कि पिछले दो दिनों से शहर के कई इलाकों में कूड़े का उठान ठप है। सड़कों के किनारे लगे कचरे के ढेर अब धीरे-धीरे मुख्य मार्गों तक फैल रहे हैं, जिससे शहर की ‘स्मार्ट सिटी’ वाली छवि पर बट्टा लग रहा है।

हड़ताल और अनुभवहीनता: आग बुझाने में ‘अनाड़ी’ सिस्टम

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ आग विकराल रूप ले रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के अनुभवी दमकल कर्मी हड़ताल पर बैठे हैं। फिलहाल आग बुझाने की कमान रोडवेज कर्मियों और सिविल डिफेंस के वॉलंटियर्स के हाथों में है। तकनीकी समझ और अनुभव की कमी के कारण एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियां लगने के बावजूद आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। मीथेन गैस के रिसाव और तेज हवाओं ने आग को कूड़े के पहाड़ों के भीतर तक पहुंचा दिया है, जिससे केवल ऊपर से पानी डालना बेअसर साबित हो रहा है।

मंत्री विपुल गोयल की एंट्री: क्या निकलेगा समाधान?

शहर की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल आज गुरुग्राम के दौरे पर हैं। मंत्री न केवल ग्राउंड जीरो का मुआयना करेंगे, बल्कि दोपहर को निगम अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग भी करेंगे। सूत्रों की मानें तो मंत्री इस विवादित प्लांट के निस्तारण कार्य में लगी कंपनी और निगम अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त रुख अपना सकते हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बंधवाड़ी के कूड़े के पहाड़ आखिर खत्म क्यों नहीं हो रहे और बार-बार आग लगने की घटनाओं पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा?

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