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Gurugram Cab Strike: गुरुग्राम कैब स्ट्राइक: सुरक्षा और सवारी की KYC की मांग को लेकर ड्राइवरों का चक्का जाम

AAmandeep Singh
गुरुग्राम कैब स्ट्राइक: सुरक्षा और सवारी की KYC की मांग को लेकर ड्राइवरों का चक्का जाम
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गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में सोमवार की सुबह दफ्तर जाने वालों के लिए मुसीबत भरी रही। ऐप-आधारित कैब चालकों ने अपनी सुरक्षा की गारंटी और सवारियों के वेरिफिकेशन की मांग को लेकर हड़ताल का ऐलान कर दिया। सेक्टर-46 से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब पूरे शहर में फैल चुका है। चालकों का साफ कहना है कि जब कंपनियों के पास ड्राइवर का आधार, पैन और पुलिस वेरिफिकेशन होता है, तो सवारी की पहचान गुप्त क्यों रखी जाती है? यह हड़ताल हाल ही में हुई एक कैब ड्राइवर की हत्या और लूटपाट की वारदातों के बाद ड्राइवरों के भीतर पनप रहे डर का नतीजा है।

फेक आईडी से बुकिंग और चालकों पर जानलेवा हमले

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हड़ताल पर बैठे चालकों का तर्क है कि अपराधी अक्सर फर्जी सिम कार्ड और नकली नाम से कैब बुक करते हैं। सुनसान इलाकों में ले जाकर न केवल गाड़ी लूटी जाती है, बल्कि विरोध करने पर ड्राइवरों की जान ले ली जाती है। प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने मांग की है कि जिस तरह बैंक या सिम कार्ड के लिए केवाईसी (Know Your Customer) जरूरी है, उसी तरह ऐप पर कैब बुक करने के लिए पैसेंजर का भी आधार लिंक होना चाहिए। इससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में अपराधी को पकड़ना आसान होगा।

शनिवार के रोष के बाद सोमवार को बड़ा कदम

बता दें कि यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। शनिवार को भी गुरुग्राम के विभिन्न हिस्सों में कैब चालकों ने विरोध जताया था, लेकिन कंपनियों और प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर सोमवार को पूर्ण हड़ताल का फैसला लिया गया। कैब यूनियनों का कहना है कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक उनकी सुरक्षा के लिए पैनिक बटन और पैसेंजर वेरिफिकेशन जैसे कड़े नियम लागू नहीं हो जाते। इस हड़ताल की वजह से इफ्को चौक, हुडा सिटी सेंटर और साइबर सिटी जैसे प्रमुख इलाकों में यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा और ऑटो चालकों ने मनमाना किराया वसूला।

कंपनियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

ड्राइवरों का आरोप है कि ऐप-बेस्ड कंपनियां कमीशन तो मोटा वसूलती हैं, लेकिन जब बात ड्राइवर की जान-माल की सुरक्षा की आती है, तो वे पल्ला झाड़ लेती हैं। फिलहाल, गुरुग्राम पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन ड्राइवरों का अडिग रवैया बता रहा है कि वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। जब तक सरकार या कैब एग्रीगेटर्स सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव नहीं करते, शहर की सड़कों पर कैब की किल्लत बनी रह सकती है।

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