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Gurugram Cyber Police: गुरुग्राम पुलिस की बड़ी कामयाबी: चीनी साइबर ठगों को बैंक खाते बेचने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार

AAmandeep Singh
गुरुग्राम पुलिस की बड़ी कामयाबी: चीनी साइबर ठगों को बैंक खाते बेचने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार
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गुरुग्राम। साइबर क्राइम का हब कहे जाने वाले गुरुग्राम में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को बेनकाब किया है, जो विदेशों में बैठे ठगों के लिए ‘स्लीपर सेल’ की तरह काम कर रहा था। ये आरोपी खुद ठगी नहीं करते थे, बल्कि ठगी की रकम को खपाने के लिए सुरक्षित बैंक खाते (Mule Accounts) उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर पानीपत से लेकर महाराष्ट्र तक फैले इस नेटवर्क के चार गुर्गों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

फर्जी फर्मों का मायाजाल और कमीशन का खेल

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पकड़े गए आरोपियों में पानीपत के बबैल गांव का प्रवेश अहलावत, अटावला का सागर, लुधियाना का अभिषेक और ठाणे का 54 वर्षीय यासीन नूर मोहम्मद शामिल है। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये आरोपी पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डमी फर्में तैयार करते थे। इन फर्मों के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे, जिन्हें बाद में अभिषेक के जरिए चीनी साइबर ठगों को बेच दिया जाता था। इस काम के लिए गिरोह को भारी-भरकम कमीशन मिलता था। अभिषेक ने कबूला कि वह प्रति खाता 1 लाख रुपये तक की डील करता था।

पासपोर्ट और चेकबुक का जखीरा बरामद

गुरुग्राम पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 16 बैंक खातों से जुड़ी सामग्रियां, डेबिट कार्ड और मोबाइल फोन के साथ-साथ 4 पासपोर्ट भी बरामद किए हैं। इन पासपोर्ट्स के मिलने से अंदेशा जताया जा रहा है कि गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी या हवाला कारोबार से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब उन दो अन्य मास्टरमाइंड्स की तलाश कर रही है, जिन्हें अभिषेक ये खाते सप्लाई करता था। गिरोह के पास से मिले मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि ठगी के शिकार हुए लोगों और ट्रांजैक्शन की डिटेल निकाली जा सके।

रिमांड पर आरोपी, खुलेंगे और भी राज

गुरुग्राम की एक अदालत ने आरोपी यासीन और सागर को न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है, जबकि मुख्य कड़ी माने जा रहे प्रवेश और अभिषेक को 2 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि अब तक इन्होंने कितने खाते ठगों को बेचे हैं और उन खातों में कितने करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ है। साइबर थाना पुलिस का कहना है कि यह एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हैं, जिनके निशाने पर भारत के आम नागरिक हैं।

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