गुरुग्राम। दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक हब गुरुग्राम में एक बार फिर आग का तांडव देखने को मिला है। गुरुग्राम के मुशदपुर-खुरमपुर गांव के नजदीक स्थित एक औद्योगिक इकाई में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात अचानक भीषण आग लग गई। रात के सन्नाटे में उठीं आग की गगनचुंबी लपटों और काले धुएं के गुबार ने चंद मिनटों में ही पूरी फैक्ट्री को अपनी आगोश में ले लिया। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन को आग पर काबू पाने के लिए जिले के पांच अलग-अलग फायर स्टेशनों से मदद बुलानी पड़ी।
दमकल विभाग को रात पौने दो बजे मिली सूचना
फायर ब्रिगेड कंट्रोल रूम से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, रात करीब 1:40 बजे मुशदपुर-खुरमपुर स्थित ‘ओम साईंराम इंडस्ट्री’ में आग लगने की सूचना मिली थी। चूंकि मामला फैक्ट्री का था, इसलिए स्थानीय पुलिस और दमकल कर्मी बिना एक पल गंवाए मौके के लिए रवाना हो गए। शुरुआती दौर में अंधेरे के कारण आग की तीव्रता को भांपना मुश्किल हो रहा था, लेकिन जब दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं तो वहां का मंजर देखकर तुरंत सीनियर अधिकारियों को वायरलेस पर मैसेज भेजकर अतिरिक्त गाड़ियां भेजने को कहा गया।
5 फायर स्टेशनों के अमले ने संभाला मोर्चा
फैक्ट्री के भीतर प्लास्टिक और केमिकल जैसे ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग तेजी से फैल रही थी। सबसे पहले नजदीक स्थित पटौदी फायर स्टेशन से गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और पानी की बौछारें शुरू कीं। इसके बाद आग की गंभीरता को देखते हुए मानेसर, भीम नगर, सेक्टर-37 और सेक्टर-29 के फायर स्टेशनों से भी तुरंत फायर ब्रिगेड के वाहनों को घटना स्थल की तरफ दौड़ाया गया। राहत कार्य में जुटे अधिकारियों के अनुसार, कुल 8 फायर टेंडरों की मदद से दमकल कर्मियों ने फैक्ट्री को चारों तरफ से घेरा और करीब 8 घंटे की भारी मशक्कत के बाद सुबह जाकर आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
बंद थी फैक्ट्री, इसलिए टल गया बड़ा जानी नुकसान
इस पूरे दर्दनाक हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई। दमकल विभाग के मुताबिक, रात का समय होने के कारण फैक्ट्री के भीतर काम बंद था और वहां श्रमिक मौजूद नहीं थे। यदि यही घटना दिन के वक्त कामकाजी घंटों के दौरान हुई होती, तो बड़ा जानी नुकसान हो सकता था। पुलिस और दमकल अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह कूलिंग का काम संपन्न होने के बाद मलबे के भीतर सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा, ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि अंदर कोई फंसा तो नहीं रह गया था।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, मालिक से मांगे एनओसी के दस्तावेज
इस अग्निकांड में फैक्ट्री मालिक को लाखों रुपए के वित्तीय नुकसान का अनुमान है। इमारत के भीतर रखीं महंगी मशीनें, तैयार माल और गोदाम में रखा कच्चा माल पूरी तरह जलकर स्वाहा हो चुका है। आग की तपिश इतनी ज्यादा थी कि फैक्ट्री की कंक्रीट की इमारत में भी दरारें आ गईं। हालांकि, आग लगने की असली वजह अभी तक आधिकारिक तौर पर साफ नहीं हो पाई है, लेकिन प्राथमिक जांच में इसे शॉर्ट सर्किट का मामला माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फैक्ट्री मालिक को तलब किया है और कंपनी के फायर सेफ्टी ऑडिट व एनओसी से जुड़े दस्तावेज पेश करने के आदेश दिए हैं।

