Gurugram News Update: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ का विवाद अब हरियाणा की सडकों तक आ पहुंचा है।
सोमवार को गुरुग्राम के शिवाजी नगर थाने के बाहर उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिसिया रवैये से खफा होकर मुख्य गेट पर ही दरी बिछाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के कार्यकारी अध्यक्ष अनिल धानक की अगुवाई में आयोजित इस प्रदर्शन में महिलाओं समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए।
‘सुबह से चक्कर कटवा रही पुलिस, नहीं दर्ज कर रही एफआईआर’
थाने के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेस नेता अनिल धानक ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि वे हल्द्वानी में दलित समाज के शीर्ष नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का अपमान करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने आए थे। लेकिन पुलिस सुबह से ही मामले को लटकाने में जुटी है।
धानक ने आरोप लगाया, “अधिकारी हमें कभी डीसीपी दफ्तर जाने की सलाह दे रहे हैं, तो कभी इसे अपने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर का मामला बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। अगर पुलिस की नीयत साफ होती तो शून्य एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की जा सकती थी। पुलिस के इसी ढुलमुल रवैये के विरोध में हमें मजबूरी में थाने के गेट पर बैठना पड़ा है।”
क्या है हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद?
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इस तीव्र गुस्से की जड़ें उत्तराखंड के हल्द्वानी की हालिया घटना से जुड़ी हैं। आरोप है कि वहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक कार्यक्रम संपन्न हुआ था, जिसके जाने के बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने उस स्थान का गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’ किया।
कांग्रेस इसे महज एक राजनीतिक बयानबाजी न मानकर दलित समाज, पिछड़े वर्ग और देश के संविधान का सीधा अपमान करार दे रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 21वीं सदी में भी इस तरह की छुआछूत और भेदभाव वाली मानसिकता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ देशभर में मोर्चा खोला जाएगा।
थाने पर बढ़ा पहरा, कानूनी राय में उलझा प्रशासन
कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के अचानक दरी बिछाकर बैठ जाने से शिवाजी नगर थाने के बाहर गहमागहमी का माहौल बन गया और देखते ही देखते लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया। हालात को देखते हुए थाने के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों और पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि घटनाक्रम दूसरे राज्य (उत्तराखंड) का है, इसलिए इस पर सीधे मामला दर्ज करने से पहले कानूनी पहलुओं को खंगाला जा रहा है और विधिक राय (Legal Opinion) ली जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेसियों ने दो टूक कह दिया है कि जब तक उनकी शिकायत पर उचित धाराओं में एफआईआर की कॉपी उनके हाथ में नहीं आ जाती, वे थाने का गेट खाली नहीं करेंगे।

