Civic Sense: वंदे भारत में बिखरा कचरा देख भड़के हर्ष गोयनका, वीडियो शेयर कर पूछा- ‘लोगों को सिविक सेंस कैसे सिखाएं?’
वंदे भारत में बिखरा कचरा देख भड़के हर्ष गोयनका, वीडियो शेयर कर पूछा- 'लोगों को सिविक सेंस कैसे सिखाएं?'
Civic Sense: देश में रेल यात्रा के अनुभव को बदलने वाली प्रीमियम ट्रेन ‘वंदे भारत’ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह इसकी रफ्तार नहीं, बल्कि यात्रियों का बर्ताव है। (Vande Bharat Train Passenger Littering Issue) उद्योगपति हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर करते हुए देशवासियों की नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव पर करारा सवाल दागा है। उन्होंने पूछा है कि जब तक लोगों में स्वच्छता और नागरिक समझ नहीं होगी, तब तक सरकार की दी गई आधुनिक सुविधाएं कितनी कामयाब होंगी?
एक वीडियो और दो अलग-अलग तस्वीरें
हर्ष गोयनका द्वारा शेयर किए गए वीडियो की शुरुआत बेहद खूबसूरत दृश्य से होती है—वंदे भारत का साफ-सुथरा, हाईटेक और व्यवस्थित डिब्बा। ट्रेन में यात्रियों को उनकी सीट पर ही चाय, नाश्ता और अखबार मुहैया कराया जा रहा है। (Civic Sense in Public Transport India) खाना खत्म होते ही मुस्तैद कैटरिंग स्टाफ इस्तेमाल की गई ट्रे वापस ले जाता है और यात्रियों को कचरा डालने के लिए गारबेज बैग भी देता है।
लेकिन, वीडियो का दूसरा हिस्सा भारतीय यात्रियों की कड़वी सच्चाई को बयां करता है। जैसे ही कैमरा डिब्बे के फर्श और सीटों की तरफ घूमता है, वहां चिप्स के रैपर, खाली कोल्ड ड्रिंक के केन और फटे हुए अखबार बिखरे नजर आते हैं। डिब्बे में डस्टबिन (कूड़ेदान) मौजूद होने के बावजूद लोगों ने कचरा अपनी सीटों की जेबों में ठूंस रखा था या फर्श पर फेंक दिया था।
“कैसे सिखाएं अपने लोगों को नागरिक समझ?”
वीडियो साझा करते हुए गोयनका ने लिखा, “How to teach our people civic sense?” (हम अपने लोगों को नागरिक समझ कैसे सिखाएं?) अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि वंदे भारत जैसी ट्रेनें भारतीय रेल के तकनीकी विकास और गति का प्रतीक हैं। वहां स्टाफ हर सुविधा दे रहा है, लेकिन यात्री खाने के बाद पैकेट सीटों के पाउच में ठूंस देते हैं, केन फर्श पर छोड़ देते हैं और अखबारों को फर्श साफ करने वाले कपड़े की तरह इस्तेमाल करते हैं। उनका साफ इशारा था कि सरकार भले ही करोड़ों खर्च कर सुविधाएं दे दे, लेकिन उनका रखरखाव जनता के हाथ में ही है।
सोशल मीडिया पर लोगों का फूटा गुस्सा, दिए तरह-तरह के सुझाव
गोयनका की इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है: (Harsh Goenka Viral X Post Indian Railways)
साक्षरता बनाम समझ: एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “डिग्री होना और शिक्षित होना दो अलग बातें हैं। हमारे देश में लोग पढ़े-लिखे तो हो गए हैं, लेकिन सार्वजनिक संपत्तियों को अपना समझने की अक्ल अब भी गायब है।”
पाठ्यक्रम में शामिल हो विषय: कई यूजर्स ने सुझाव दिया कि प्राथमिक स्कूलों से ही बच्चों को ‘सिविक सेंस’ और सार्वजनिक जिम्मेदारी की पढ़ाई अनिवार्य विषय के रूप में कराई जानी चाहिए।
How to teach our people civic sense 🙈 pic.twitter.com/ZEreYIlGW2
— Harsh Goenka (@hvgoenka) September 23, 2026
सख्त जुर्माने की मांग: कुछ लोगों का मानना था कि सिर्फ नसीहत से काम नहीं चलेगा। सिंगापुर की तर्ज पर ट्रेन में गंदगी फैलाने वाले यात्रियों पर भारी चालान और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
कुल मिलाकर, इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक भारत के निर्माण में केवल विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर ही काफी नहीं है, बल्कि देशवासियों को भी अपनी मानसिकता और व्यवहारिक आदतों में बदलाव लाना होगा।
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