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Haryana Bank Scam CBI : IDFC और कोटक बैंक कर्मियों ने कैसे किया 748 करोड़ का फर्जीवाड़ा? अब सीबीआई उगलवाएगी सच

AAmandeep Singh
IDFC और कोटक बैंक कर्मियों ने कैसे किया 748 करोड़ का फर्जीवाड़ा? अब सीबीआई उगलवाएगी सच
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हरियाणा। हरियाणा की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाने वाले 748 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में राज्य सरकार ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश को हरी झंडी दे दी है। यह मामला सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों के फंड में हेराफेरी से जुड़ा है, जिसमें निजी बैंकों के कर्मचारियों ने मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का गबन किया। सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम के तहत अपनी सहमति केंद्र को भेज दी है, जिससे अब सीबीआई को हरियाणा में इस केस की तह तक जाने के पूरे अधिकार मिल गए हैं।

IDFC फर्स्ट बैंक से शुरू होगा एक्शन का कारवां

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जांच के पहले चरण में उस 590 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े पर फोकस रहेगा, जिसमें 18 सरकारी विभागों का पैसा लगा था। हालांकि, राहत की बात यह है कि IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े घोटाले की पूरी रकम सरकार के खाते में वापस आ चुकी है, लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी बताई जा रही हैं। आरोप है कि बैंकों के पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों ने सरकारी फंड को निजी खातों और जेवर कारोबारियों के जरिए ठिकाने लगाने की कोशिश की थी। हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) इस मामले में पहले ही बैंक कर्मियों और जेवर व्यापारियों सहित वित्त विभाग के दो अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेज चुका है।

रडार पर ‘बड़े साहब’: IAS अधिकारियों तक पहुंच सकती है आंच

इस घोटाले की आंच केवल बैंक कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। एसीबी की अब तक की पड़ताल में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। सूत्रों का कहना है कि बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के इतनी बड़ी राशि की हेराफेरी संभव नहीं थी। यही वजह है कि राज्य सरकार ने मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का निर्णय लिया, ताकि बिना किसी स्थानीय दबाव के निष्पक्ष जांच हो सके। सीबीआई अब उन कड़ियों को जोड़ेगी कि कैसे सरकारी खजाने से पैसा निकलकर निजी बैंकों के ‘भ्रष्ट’ नेटवर्क तक पहुंचा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सैनी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ दांव

सैनी सरकार के इस फैसले को भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घोटाले की व्यापकता को देखते हुए राज्य की जांच एजेंसियां पर्याप्त नहीं थीं, क्योंकि इसके तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं। कोटक महिंद्रा और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े मामलों की फाइलें भी जल्द ही सीबीआई के सुपुर्द की जा सकती हैं। फिलहाल, विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सीबीआई जांच की सिफारिश कर सरकार ने गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है।

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