हरियाणा। हरियाणा के बिजली क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार की पटकथा लिखी जा चुकी है। राज्य की तीसरी बिजली वितरण कंपनी यानी ‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ के गठन की आधिकारिक घोषणा के बाद अब महकमा इसे धरातल पर उतारने के लिए युद्धस्तर पर जुट गया है। इस पूरी कवायद को सही दिशा देने और दोनों मौजूदा बिजली निगमों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए एक बेहद अनुभवी चेहरे पर भरोसा जताया गया है। मुख्य अभियंता दीपक पोपली को इस पूरी योजना का सर्वेसर्वा यानी नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो नीतिगत सुधारों से लेकर फील्ड स्तर पर होने वाली हर हलचल पर पैनी नजर रखेंगे।
सिर्फ 10 पैसे यूनिट बिजली, चुनौतियां भी कम नहीं
दीपक पोपली की यह नियुक्ति ऐसे नाजुक वक्त में हुई है जब सरकार किसानों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली देने के साथ-साथ अपने वित्तीय गणित को भी सुधारना चाहती है। वर्तमान व्यवस्था में हरियाणा के अन्नदाताओं को महज 10 पैसे प्रति यूनिट के सांकेतिक दाम पर बिजली दी जा रही है। इसके पीछे की बड़ी हकीकत यह है कि राज्य सरकार को हर साल अपने खजाने से लगभग 7,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी बिजली निगमों को देनी पड़ती है। नई कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस भारी-भरकम सब्सिडी के प्रबंधन के साथ-साथ घाटे को कम करने की होगी।
ट्यूबवेल कनेक्शन से लेकर बिलिंग तक, सब एक छत के नीचे
अब तक कृषि क्षेत्र की बिजली व्यवस्था UHBVN और DHBVN के सामान्य नेटवर्क का हिस्सा थी, जिससे कई बार तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आती थीं। लेकिन अब ‘हरियाणा एग्री डिस्कॉम’ के पास सूबे के सभी कृषि फीडरों और उपभोक्ताओं का एकाधिकार होगा। नए ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने की रफ्तार बढ़ानी हो, फुके हुए ट्रांसफार्मर को रिकॉर्ड समय में बदलना हो, या फिर बिजली की चोरी रोकना और बिलिंग दुरुस्त करना— ये सारे काम अब इसी नई कंपनी के दायरे में आएंगे। इसके अलावा, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री कुसुम योजना’ के तहत लगने वाले सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को भी इसी नए सिस्टम से सीधे लिंक किया जाएगा।
देनदारियों का ट्रांसफर और 3600 कर्मियों की फौज
एक नए निगम को खड़े करने के लिए सिर्फ कागजी आदेश काफी नहीं होते, बल्कि संसाधनों का बड़ा हेरफेर भी करना पड़ता है। ऊर्जा विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक, इस नई कंपनी को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 3,100 से 3,600 कर्मचारियों और अधिकारियों की जरूरत होगी। ये सभी कर्मी बाहर से नहीं आएंगे, बल्कि मौजूदा दोनों डिस्कॉम से ही यहां प्रतिनियुक्ति या ट्रांसफर पर भेजे जाएंगे।
प्रशासनिक अमले के साथ-साथ वित्तीय लायबिलिटी (देनदारियां) भी ट्रांसफर हो रही हैं। कृषि श्रेणी से जुड़े करीब 166.82 करोड़ रुपये के बकाया राजस्व (एरियर) और लगभग 5,427 करोड़ रुपये की देनदारियों का बोझ भी इस नए नवेले निगम के खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। बिजली महकमे के अधिकारियों का दावा है कि अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो आजादी के जश्न यानी 15 अगस्त 2026 तक हरियाणा एग्री डिस्कॉम पूरी तरह कामकाजी मोड में आ जाएगी, जो देश के कृषि प्रधान राज्यों के लिए एक नजीर बन सकता है।

