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Haryana Bank Scam CBI Inquiry: 590 करोड़ का आईडीएफसी-एयू बैंक स्कैम: सीबीआई की रडार पर दो सीनियर आईएएस

AAmandeep Singh
590 करोड़ का आईडीएफसी-एयू बैंक स्कैम: सीबीआई की रडार पर दो सीनियर आईएएस
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हरियाणा। हरियाणा के प्रशासनिक हलके में इस समय जबरदस्त बेचैनी का माहौल है। 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले की परतें खोलने में जुटी सीबीआई को जैसे ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की हरी झंडी मिली, जांच की रफ्तार दोगुनी हो गई है। कानूनी अड़चनों को दूर करते हुए सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत बड़े अफसरों पर कार्रवाई की इजाजत दे दी। इसके तुरंत बाद शनिवार को सीबीआई की टीम ने वरिष्ठ आईएएस पंकज अग्रवाल और मोहम्मद शाइन को तलब कर लिया। मैराथन पूछताछ के दौरान जब अधिकारियों के जवाबों में विरोधाभास दिखा, तो एजेंसी ने उनके मोबाइल फोन तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिए।

आईएएस अनीश यादव ने कैसे खोला था भ्रष्टाचार का खेल?

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इस पूरे आर्थिक साम्राज्य के ढहने की कहानी साल 2024 में शुरू हुई थी। तत्कालीन कृषि निदेशक और 2014 बैच के आईएएस अफसर अनीश यादव को सरकारी फंड में कुछ गड़बड़ी की बू आई। उन्होंने बिना देर किए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया। इस कमेटी की तफ्तीश में जो सच बाहर आया, उसने सरकार की आंखें खोल दीं। रिपोर्ट में साफ हुआ कि नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर आईडीएफसी बैंक में 50 करोड़ और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 25 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। विजिलेंस से लेकर अब सीबीआई तक की पूरी जांच इसी शुरुआती रिपोर्ट के इर्द-गिर्द घूम रही है।

ऊपर से था खाता बदलने का दबाव, फाइलों से खुले राज

जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों से एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विकास एवं पंचायत विभाग में तैनात रहे एक रसूखदार अधिकारी द्वारा मातहतों पर इन दोनों निजी बैंकों में सरकारी खाते खोलने के लिए चौतरफा दबाव बनाया जा रहा था। बात जब हद से ज्यादा बढ़ गई, तो आईएएस डीके बेहरा की ओर से एक आधिकारिक पत्र जारी हुआ। इस पत्र में ऑन-रिकॉर्ड लिखा गया कि ‘विभाग के एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी के साथ टेलीफोन पर हुई चर्चा के बाद’ ही इन दोनों नए बैंकों में खाता खोलने के आदेश दिए जा रहे हैं। सीबीआई ने इस सरकारी चिट्ठी को अपने केस की सबसे मजबूत कड़ी बना लिया है।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और मुख्य आरोपी की ठाठ-बाठ

जांच के दायरे में आए अधिकारी इससे पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली उत्पादन निगम और पंचकूला नगर निगम जैसे मलाईदार विभागों में तैनात रह चुके हैं। इन महकमों से फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपये इधर से उधर किए गए। इस खेल में शामिल तीन अकाउंट अफसरों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पता चला कि मुख्य आरोपी और जेल में बंद बर्खास्त सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार की बहाली के लिए सरकार के ही एक रसूखदार मंत्री ने पैरवी की थी। हालांकि, यह सिफारिश घोटाले के उजागर होने से ठीक पहले की गई थी। विजिलेंस को नरेश के खाते में 11 करोड़ रुपये की संदिग्ध एंट्री, मोहाली में आलीशान फ्लैट और महंगी गाड़ियों के दस्तावेज मिले हैं, जिसकी कड़ियां अब सीबीआई जोड़ रही है।

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