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Haryana Bank Scam: हरियाणा बैंक घोटाला: CBI की रडार पर 5 बड़े IAS, ऑडियो क्लिप ने बढ़ाई मुश्किलें

AAmandeep Singh
हरियाणा बैंक घोटाला: CBI की रडार पर 5 बड़े IAS, ऑडियो क्लिप ने बढ़ाई मुश्किलें
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हरियाणा। हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों ‘590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले’ को लेकर जबरदस्त खलबली मची हुई है। आईडीएफसी (IDFC) और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े में सीबीआई की जांच अब सचिवालय की ऊंची चौखटों तक जा पहुंची है। केंद्रीय जांच एजेंसी की शुरुआती तफ्तीश में प्रदेश के 5 कद्दावर आईएएस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना लगभग तय माना जा रहा है।

ऑडियो क्लिप और बैंक अफसरों के बयानों ने फंसाया पेंच

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सीबीआई सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, रिमांड पर लिए गए बैंक प्रबंधकों और लेखा अधिकारियों ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी के हाथ एक ऐसी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी लगी है, जिसमें कथित तौर पर बैंक मैनेजर और उच्च अधिकारियों के बीच संदिग्ध बातचीत दर्ज है। इन डिजिटल सबूतों और गिरफ्तार आरोपियों के बयानों को आधार बनाकर ही सीबीआई ने अब सीधे आईएएस अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर ली है।

धारा 17-A के तहत सरकार से मांगी अनुमति

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के कड़े प्रावधानों के तहत, सीबीआई ने हरियाणा सरकार से इन 5 अधिकारियों के खिलाफ जांच और पूछताछ की औपचारिक अनुमति मांगी है। नियम के अनुसार, किसी भी लोक सेवक के आधिकारिक फैसलों पर सवाल उठाने या जांच करने के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होती है। सूत्रों का कहना है कि इससे जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय और उच्चाधिकारियों के पास पहुंच चुकी है। जानकारों का मानना है कि चूंकि राज्य सरकार ने खुद ही इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी, इसलिए अब अनुमति रोकना सरकार के लिए खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।

नियमों को ताक पर रखकर हुआ करोड़ों का खेल

आरोप है कि सरकारी खजाने के करोड़ों रुपये नियमों की अनदेखी कर निजी बैंकों में जमा कराए गए। जांच में ऐसे दस्तावेज और ‘फाइल मूवमेंट’ मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि वित्तीय मंजूरियों और भुगतान की प्रक्रिया में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने आपत्तियों को दरकिनार किया था। सीबीआई अब इन फाइलों और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की फॉरेंसिक जांच करवा रही है ताकि पूछताछ के दौरान अधिकारियों के बयानों को क्रॉस-वेरिफाई किया जा सके।

कइयों पर गिर चुकी है गाज, कई हुए साइडलाइन

इस घोटाले की आंच सरकार पहले ही महसूस कर रही है। पिछले दिनों प्रशासनिक सर्जरी करते हुए सरकार ने आर.के. सिंह और प्रदीप डागर जैसे आईएएस अफसरों को सस्पेंड कर दिया था। इसके अलावा, डॉ. साकेत कुमार, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग और डी.के. बेहरा जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को उनके मलाईदार पदों से हटाकर कम महत्व वाले विभागों में भेज दिया गया है।

अब जबकि सीबीआई ने सीधे पूछताछ की इजाजत मांग ली है, यह साफ है कि आने वाले दिनों में हरियाणा की नौकरशाही में और बड़े धमाके हो सकते हैं।

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