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Haryana Board Exam : हरियाणा बोर्ड की कॉपियों में 'इमोशनल ड्रामा': छात्रा ने लिखा- "पास कर दो, वरना टूट जाएगा रिश्ता"

AAmandeep Singh
हरियाणा बोर्ड की कॉपियों में 'इमोशनल ड्रामा': छात्रा ने लिखा- "पास कर दो, वरना टूट जाएगा रिश्ता"
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भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की सीनियर सेकेंडरी परीक्षाओं का मूल्यांकन इन दिनों पूरे शबाब पर है, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं से जो तस्वीरें और किस्से निकलकर सामने आ रहे हैं, वे परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ छात्रों की मानसिक स्थिति पर भी सवालिया निशान खड़े करते हैं। कॉपियों की जांच कर रहे शिक्षक उस वक्त सन्न रह गए, जब कई छात्रों ने पन्नों पर उत्तर की जगह अपनी निजी जिंदगी की उलझनें और भावुक कर देने वाली मिन्नतें लिख डालीं।

“रिश्ता टूट जाएगा सर, प्लीज पास कर दो”

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भिवानी से आई रिपोर्ट के मुताबिक, मार्किंग सेंटरों पर एक के बाद एक ऐसी कॉपियां मिल रही हैं जिनमें छात्रों ने पास होने के लिए ‘इमोशनल कार्ड’ खेला है। एक छात्रा की कॉपी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, जिसमें लिखा था— “सर, मुझे पास कर देना, वरना मेरा रिश्ता टूट जाएगा।” वहीं, एक अन्य छात्र ने अपनी मां की गंभीर बीमारी का वास्ता देते हुए लिखा कि वह पूरे साल पढ़ नहीं पाया और अब पास होना उसके भविष्य के लिए अनिवार्य है। ये संदेश केवल गुहार नहीं, बल्कि उन किशोरों के मन के डर और सामाजिक दबाव को भी दर्शाते हैं, जो परीक्षा को जीवन-मरण का सवाल मान बैठे हैं।

पहचान उजागर करना पड़ा भारी

बोर्ड ने साफ किया है कि महज भावुक अपील लिखने वालों पर नरमी बरती जा सकती है, लेकिन जिन्होंने अपनी पहचान, रोल नंबर या स्कूल का नाम उत्तर पुस्तिका के भीतर लिखा है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। नियमों के उल्लंघन के आरोप में ऐसे परीक्षार्थियों के खिलाफ ‘अनफेयर मीन्स’ (UMC) के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं। मूल्यांकन केंद्रों पर तैनात शिक्षकों का कहना है कि हर साल दो-चार ऐसे मामले आते थे, लेकिन इस बार इन संदेशों की संख्या और इनमें लिखी गई बातें काफी हैरान करने वाली हैं।

नियमों के आगे भावनाएं बेअसर: बोर्ड चेयरमैन

इस मामले पर हरियाणा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने सख्त लहजे में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दो-टूक कहा, “बोर्ड में अंक केवल और केवल सही उत्तर लिखने पर ही मिलते हैं। किसी भी छात्र की व्यक्तिगत परेशानी या भावुक अपील का मूल्यांकन प्रक्रिया पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ता।” उन्होंने आगे जोड़ा कि यह बढ़ते मानसिक दबाव का संकेत है। छात्र अक्सर डर या परिवार की उम्मीदों के बोझ तले इस तरह के कदम उठाते हैं। चेयरमैन ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि परीक्षा को एक सामान्य प्रक्रिया की तरह लें और शॉर्टकट या गुहार लगाने के बजाय तैयारी पर ध्यान दें।

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