Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

HBSE 10th Result 2026: लिंगानुपात में पीछे लेकिन पढ़ाई में आगे निकलीं बेटियां, चरखी दादरी बना टॉपर जिला

AAmandeep Singh
हरियाणा बोर्ड 10वीं रिजल्ट: लिंगानुपात में पीछे लेकिन पढ़ाई में आगे निकलीं बेटियां, चरखी दादरी बना टॉपर जिला
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

हरियाणा। हरियाणा की सामाजिक संरचना में भले ही लिंगानुपात (SRB) का गिरता आंकड़ा (895) चिंता का विषय बना हुआ है, लेकिन जब बात कलम की ताकत की आती है, तो यहाँ की बेटियां ‘असली सिंघम’ बनकर उभरती हैं। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) द्वारा घोषित 10वीं के परीक्षा परिणामों ने एक बार फिर इस सच पर मुहर लगा दी है। जहाँ लड़कों का पास प्रतिशत 87.69 रहा, वहीं लड़कियों ने 91.64 फीसदी की सफलता दर हासिल कर यह बता दिया कि वे किसी भी चुनौती से कम नहीं हैं। यह आंकड़ा न केवल उनकी मेहनत को दर्शाता है, बल्कि उन रूढ़ियों को भी तोड़ता है जो आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटियों की शिक्षा के आड़े आती हैं।

गांवों की मेधा ने शहरों को दिखाया आइना

विज्ञापन

अक्सर यह धारणा रहती है कि शहरों में बेहतर कोचिंग और संसाधनों की उपलब्धता के कारण वहां के छात्र ज्यादा चमकेंगे, लेकिन इस बार के नतीजों ने इस मिथक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने 90.25% सफलता के साथ बाजी मारी है, जबकि शहरी छात्र 87.94% पर ही सिमट गए। गांवों के बच्चों की यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि वे अक्सर घरेलू कामकाज और सीमित संसाधनों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। यह ट्रेंड पिछले कुछ सालों से लगातार बना हुआ है, जो ग्रामीण हरियाणा में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का बड़ा संकेत है।

प्राइवेट स्कूलों की बादशाहत, सरकारी तंत्र को मंथन की जरूरत

नतीजों के आंकड़ों पर गौर करें तो निजी और सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन में एक स्पष्ट खाई नजर आती है। प्राइवेट स्कूलों के 92.45% छात्र पास हुए हैं, जबकि सरकारी स्कूलों का आंकड़ा 87.23% रहा। भले ही सरकारी स्कूलों के स्तर में सुधार हुआ है, लेकिन 5 फीसदी से ज्यादा का यह अंतर बताता है कि सरकारी तंत्र को अभी बुनियादी स्तर पर काफी काम करने की जरूरत है। परीक्षा में शामिल हुए कुल 2,47,860 छात्रों में से मेरिट सूची में जगह बनाने वाले अधिकांश छात्र निजी संस्थानों से ही हैं, जो अभिभावकों के बीच प्राइवेट स्कूलों के प्रति बढ़ते आकर्षण की मुख्य वजह भी है।

चरखी दादरी अव्वल, नूंह की राह अब भी मुश्किल

जिलों के प्रदर्शन की बात करें तो चरखी दादरी ने अपनी बादशाहत कायम रखते हुए पूरे प्रदेश में टॉप किया है। यहाँ के विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से सर्वश्रेष्ठ परिणाम दिए हैं। इसके विपरीत, नूंह (मेवात) जिला एक बार फिर फिसड्डी साबित हुआ है। नूंह का सबसे पीछे रहना यह इशारा करता है कि प्रदेश के इस हिस्से में अभी भी शैक्षिक पिछड़ापन एक गंभीर समस्या है। बोर्ड प्रशासन और शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि वे पिछड़े जिलों के लिए विशेष रणनीति तैयार करेंगे ताकि भविष्य में इन क्षेत्रों के छात्रों को भी मुख्यधारा के बराबर लाया जा सके।

विज्ञापन

हरियाणा की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।