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Smart Books QR Code: हरियाणा बोर्ड की नई पहल: किताबों में छपा होगा QR कोड, अब वीडियो देखकर पढ़ाई करेंगे छात्र

AAmandeep Singh
हरियाणा बोर्ड की नई पहल: किताबों में छपा होगा QR कोड, अब वीडियो देखकर पढ़ाई करेंगे छात्र
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हरियाणा। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का अंदाज पूरी तरह बदलने वाला है। प्रदेश का शिक्षा विभाग पारंपरिक ब्लैकबोर्ड और किताबों के ढांचे को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र से 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के हाथ में ऐसी ‘स्मार्ट’ किताबें होंगी, जिनमें केवल टेक्स्ट ही नहीं, बल्कि वीडियो का खजाना भी छिपा होगा। किताबों के हर पाठ के साथ एक क्यूआर कोड प्रिंट किया गया है, जिसे स्कैन करते ही छात्र उस विषय के एक्सपर्ट टीचर का वीडियो लेक्चर देख सकेंगे। यह पहल उन छात्रों के लिए मील का पत्थर साबित होगी जो क्लास में पढ़ाई गई बातों को घर जाकर दोहराना चाहते हैं।

कोचिंग और ट्यूशन के खर्च से मिलेगी मुक्ति

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पीजीटी शिक्षक अमित किशोर वशिष्ठ के मुताबिक, इस डिजिटल बदलाव का सबसे बड़ा फायदा विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे जटिल विषयों में देखने को मिलेगा। अक्सर छात्र क्लास में संकोचवश सवाल नहीं पूछ पाते या घर जाने तक कुछ कॉन्सेप्ट्स भूल जाते हैं।

अब ऐसी स्थिति में उन्हें महंगे ट्यूशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। छात्र घर बैठे अपनी सुविधा के अनुसार वीडियो को जितनी बार चाहें देख सकते हैं। इससे न केवल उनके कॉन्सेप्ट मजबूत होंगे, बल्कि रट्टा मारने की प्रवृत्ति पर भी लगाम लगेगी।

डिजिटल लर्निंग से रटेगा नहीं, समझेगा छात्र

इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों के सीखने के तरीके को दिलचस्प और प्रभावी बनाना है। वीडियो लेक्चर्स को इस तरह तैयार किया गया है कि वे एनीमेशन और ग्राफिक्स के जरिए विषय को सरल बना सकें। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विजुअल लर्निंग यानी देखकर सीखना, पढ़ने के मुकाबले दिमाग पर ज्यादा गहरी छाप छोड़ता है। आने वाले सत्र में जब यह योजना पूरी तरह धरातल पर उतरेगी, तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी निजी स्कूलों की तरह आधुनिक संसाधनों से लैस नजर आएंगे।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन विभाग की तैयारी पूरी है कि सत्र शुरू होते ही छात्रों को ये नई किताबें थमा दी जाएं। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो हरियाणा देश के उन चुनिंदा राज्यों में शुमार हो जाएगा जहां सरकारी स्कूली शिक्षा को सबसे पहले हाई-टेक बनाया गया है।

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