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Nayab Singh Saini Cabinet: नायब सरकार की नई नीति: 10 एकड़ और 50 फैक्ट्रियां होने पर नियमित होंगे अवैध इंडस्ट्रियल एरिया, शर्तें लागू

GGaganpreet Kaur
नायब सरकार की नई नीति: 10 एकड़ और 50 फैक्ट्रियां होने पर नियमित होंगे अवैध इंडस्ट्रियल एरिया, शर्तें लागू
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हरियाणा। हरियाणा में वर्षों से बिना मंजूरी के चल रही फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल कॉलोनियों के दिन अब बहुरने वाले हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई में सोमवार को चंडीगढ़ में हुई कैबिनेट की अहम बैठक में ‘हरियाणा मैनेजमेंट ऑफ सिविक अमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट एरिया आउटसाइड म्यूनिसिपल एरिया (स्पेशल प्रोविजंस) संशोधन अधिनियम’ के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस कदम से राज्य के उन हजारों छोटे-बड़े उद्यमियों को सीधा फायदा होगा, जो अब तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और सीलिंग की तलवार लटकने के डर से सहमे हुए थे। अब इन क्षेत्रों को बकायदा योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।

रिहायशी की तर्ज पर अब उद्योगों को भी राहत, बजट की घोषणा पर अमल

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बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि साल 2021 में सरकार ने निकायों से बाहर बुनियादी सुविधाओं से वंचित रिहायशी इलाकों को नागरिक सुविधाएं देने के लिए एक विशेष कानून बनाया था। अप्रैल 2023 में इसमें कुछ ढील भी दी गई थी, लेकिन तब औद्योगिक क्षेत्र इस दायरे से बाहर थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद बजट के दौरान उद्यमियों से यह वादा किया था कि रिहायशी इलाकों की तर्ज पर अवैध औद्योगिक क्षेत्रों को भी नियमित किया जाएगा। उसी वादे पर अमल करते हुए पहले अक्टूबर में कानून बदला गया और अब उसकी पूरी कार्यप्रणाली को कैबिनेट की मुहर मिल गई है।

नियमित होने के लिए शर्तें तय, 10 एकड़ का क्लस्टर होना जरूरी

सरकार ने इस राहत के साथ-साथ कुछ कड़े पैमाने भी तय किए हैं ताकि नीति का दुरुपयोग न हो। नए नियमों के मुताबिक, केवल उन्हीं अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को इस दायरे में शामिल किया जाएगा जो कम से कम 10 एकड़ के एकमुश्त (लगातार) क्षेत्र में फैली हों। इसके अलावा, उस क्लस्टर के भीतर कम से कम 50 औद्योगिक इकाइयों का चलना बेहद जरूरी है। एक और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यह पूरा निर्माण 3 अक्टूबर से पहले का होना चाहिए। इस कट-ऑफ डेट के बाद बने ढांचों को इस नीति का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से उद्योगों को बैंक लोन, बिजली कनेक्शन और पर्यावरण मंजूरी (EC) मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

ऑनलाइन पोर्टल से होगा आवेदन, भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

इस पूरी व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने के प्रस्ताव को भी पास किया है। अब किसी भी फैक्ट्री मालिक या एसोसिएशन को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। उद्योगपति इस पोर्टल के जरिए सीधे आवेदन कर अपने क्षेत्र को ‘इंफ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट इंडस्ट्रियल एरिया’ घोषित करने की मांग उठा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर भी पूरी तरह से लगाम कसी जा सकेगी।

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