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Haryana Unique Wedding: चरखी दादरी में अनोखी शादी, फेरों से पहले दूल्हा-दुल्हन ने कराया HIV टेस्ट

AAmandeep Singh
Haryana Unique Wedding: चरखी दादरी में अनोखी शादी, फेरों से पहले दूल्हा-दुल्हन ने कराया HIV टेस्ट
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चरखी दादरी। शादी-ब्याह में लाखों-करोड़ों की फिजूलखर्ची और तामझाम के इस दौर में हरियाणा के चरखी दादरी से एक ऐसी सुखद तस्वीर सामने आई है, जिसने रूढ़िवादी समाज को एक नया आईना दिखाया है। यहां एक शादी इन दिनों पूरे देश के सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस विवाह की खास बात यह रही कि दूल्हा और दुल्हन ने पारंपरिक रस्मों-रिवाजों और अंधविश्वास से ऊपर उठकर सबसे पहले अपनी चिकित्सा जांच (Medical Test) को तवज्जो दी। दोनों ने शादी की वेदी पर बैठने से पहले एचआईवी टेस्ट करवाया और जब दोनों की रिपोर्ट सामान्य आई, तभी एक-दूसरे का हाथ थामने का फैसला किया।

बाबा साहेब की गवाही और कलम की सौगात

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सादगी की मिसाल बनी इस शादी में न तो कोई बैंड-बाजा था, न कोई बारात की चकाचौंध और न ही कोई दिखावा। पारंपरिक फेरों के बजाय इस जोड़े ने संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के समक्ष खड़े होकर बेहद गरिमामय ढंग से एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। यही नहीं, अमूमन जयमाला के समय जो फूल और वरमालाएं सुर्खियां बटोरती हैं, उसकी जगह इस शादी में दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को ‘कलम’ (Pen) भेंट की। इस अनोखे कदम के जरिए उन्होंने समाज को यह बताने की कोशिश की कि शिक्षा ही किसी भी मजबूत परिवार और राष्ट्र की असली नींव है।

पेशे से काउंसलर हैं दोनों, झिझक तोड़ने की उठाई कसम

इस अनूठी शादी के सूत्रधार बने चरखी दादरी के रहने वाले मनेंद्र दहिया और मोनिका तंवर, जो पेशे से खुद काउंसलर हैं और समाज की मनोदशा को करीब से समझते हैं। अपने फैसले पर बात करते हुए मनेंद्र दहिया ने बताया कि शादी सिर्फ दो परिवारों का मिलन या कोई सामाजिक रस्म नहीं है, बल्कि यह जीवन भर के विश्वास और जिम्मेदारी का रिश्ता है। आज के युवाओं को बिना किसी झिझक के विवाह से पहले अपनी स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो सके। वहीं, दुल्हन मोनिका ने कहा कि हमारे समाज में आज भी एचआईवी या यौन स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बात करने से लोग कतराते हैं, जबकि सही समय पर जागरूकता ही इसका एकमात्र बचाव है।

पिता और सामाजिक संगठनों ने थपथपाई पीठ

इस सादगीपूर्ण और जागरूक विवाह को देखने पहुंचे मेहमान और सामाजिक कार्यकर्ता भी नवदंपति की सोच के कायल हो गए। मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने कहा कि आज जब शादियां केवल स्टेटस सिंबल और कर्ज का कारण बनती जा रही हैं, ऐसे में मनेंद्र और मोनिका की यह पहल युवाओं को नई दिशा दिखाएगी। वहीं, मनेंद्र के पिता कृष्ण दहिया ने गर्व से कहा कि उनके बच्चों ने जो रास्ता चुना है, वह समाज में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाएगा। उन्होंने अन्य माता-पिता और युवाओं से भी अपील की है कि वे इस तरह के प्रगतिशील विचारों को अपनाएं और शादियों को आडंबर मुक्त बनाएं।

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