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Haryana Government Virtual Meetings: हरियाणा में वीआईपी कल्चर पर ब्रेक: सीएम सैनी ने अपने काफिले की गाड़ियां की आधी, सरकारी बैठकें अब सिर्फ वर्चुअल

AAmandeep Singh
हरियाणा में वीआईपी कल्चर पर ब्रेक: सीएम सैनी ने अपने काफिले की गाड़ियां की आधी, सरकारी बैठकें अब सिर्फ वर्चुअल
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हरियाणा। चंडीगढ़ के गलियारों से लेकर जिलों के प्रशासनिक दफ्तरों तक अब हरियाणा सरकार का मिजाज बदला-बदला नजर आएगा। राजकोष पर बढ़ते बोझ और ईंधन की बढ़ती खपत को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल बेहद जरूरी होने पर ही अफसर या मंत्री फाइलों के साथ चंडीगढ़ का रुख करेंगे, बाकी तमाम कामकाज डिजिटल स्क्रीन के जरिए निपटाए जाएंगे। इस फैसले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह हालिया अपील है, जिसमें उन्होंने देश भर के मुख्यमंत्रियों से सरकारी मशीनरी में ईंधन की खपत घटाने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की बात कही थी।

काफिले की गाड़ियां आधी; मुख्यमंत्री ने बदली अपनी ही सुरक्षा की रवायत

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आम तौर पर मुख्यमंत्रियों के दौरों के समय गाड़ियों का एक लंबा-चौड़ा वीआईपी लवाजमा सड़कों पर दौड़ता नजर आता है, जिससे न सिर्फ जनता परेशान होती है बल्कि लीटरों के हिसाब से ईंधन भी फूंक दिया जाता है। इस परिपाटी को बदलते हुए सीएम नायब सिंह सैनी ने एक कड़ा और बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात गाड़ियों के बेड़े को सीधे आधा कर दिया। अब सीएम के काफिले में 8 की जगह महज 4 गाड़ियां ही शामिल रहेंगी। मुख्यमंत्री ने साफ लफ्जों में कहा है कि जब तक अगले आदेश नहीं आते, उनके साथ केवल वही सुरक्षा वाहन चलेंगे जिनके बिना काम नहीं चल सकता।

मुख्य सचिव की दो टूक: कार-पूलिंग करें अफसर, दफ्तरों को भी निर्देश

इस नई व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी भी पूरी तरह एक्शन में दिख रहे हैं। उन्होंने राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला उपायुक्तों (DC) को सख्त हिदायत दी है कि वे सरकारी वाहनों का बेजा इस्तेमाल तुरंत बंद करें। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सलाह दी है कि यदि एक ही रूट पर जाना हो तो कार-पूलिंग (साझा वाहन) का इस्तेमाल करें और जहां तक संभव हो, सरकारी बेड़े में शामिल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को ही सड़क पर उतारें।

सरकार और संगठन दोनों अब ‘वर्चुअल’ मोड पर

बदलाव की यह बयार सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने सांगठनिक ढांचे को इसी ढर्रे पर ढालना शुरू कर दिया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने पार्टी पदाधिकारियों से दो टूक कह दिया है कि अब चंडीगढ़ या दिल्ली में बार-बार बड़ी बैठकें बुलाकर कार्यकर्ताओं का समय और पैसा बर्बाद नहीं किया जाएगा। मंडल स्तर से लेकर प्रदेश स्तर की अधिकांश सांगठनिक बैठकें अब ऑडियो-वीडियो कॉल और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए ही संचालित की जाएंगी। सरकार और संगठन के इस साझा प्रयास से न सिर्फ पर्यावरण को राहत मिलेगी, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा भी बेवजह धुएं में नहीं उड़ेगा।

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