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Haryana Congress News: हरियाणा कांग्रेस में बड़ी कार्रवाई: 5 विधायकों को 'क्रॉस वोटिंग' का नया नोटिस, 7 दिन की डेडलाइन

AAmandeep Singh
हरियाणा कांग्रेस में बड़ी कार्रवाई: 5 विधायकों को 'क्रॉस वोटिंग' का नया नोटिस, 7 दिन की डेडलाइन
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हरियाणा। चंडीगढ़ के सियासी गलियारों में पिछले कुछ दिनों से चल रही ‘अंतरात्मा की आवाज’ वाली बहस अब कानूनी नोटिस की दहलीज पर पहुँच गई है। हरियाणा राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस हाईकमान ने उन 5 विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया। रोचक बात यह है कि कांग्रेस ने अपने पुराने नोटिस में संशोधन करते हुए अब नया और बेहद कड़ा नोटिस थमाया है। पहले जहां केवल ‘वोट कैंसिल’ या ‘इनवैलिड’ होने की तकनीकी बात कही गई थी, वहीं अब कांग्रेस ने सीधे तौर पर इसे ‘पार्टी के साथ गद्दारी’ और जानबूझकर की गई ‘क्रॉस वोटिंग’ करार दिया है।

तकनीकी चूक नहीं, यह जानबूझकर दिया गया ‘धोखा’ है

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पार्टी सूत्रों और अनुशासन समिति के रुख से स्पष्ट है कि कांग्रेस अब नरम पड़ने के मूड में नहीं है। अनुशासन समिति के सदस्य सचिव एडवोकेट रोहित जैन के माध्यम से जारी इस नए नोटिस में लिखा गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान इन विधायकों ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध (बैलेट नंबर-1) को वोट न देकर विपक्षी खेमे की मदद की। पार्टी का मानना है कि वोट का इनवैलिड होना एक तकनीकी गलती हो सकती है, लेकिन क्रॉस वोटिंग करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद पार्टी के उम्मीदवार को हराना था। इसी आधार पर इसे ‘गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधि’ माना गया है।

7 दिन का अल्टीमेटम, रतिया विधायक को भी लपेटा

अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक के निर्देश पर जारी यह नोटिस रेनू बाला, शैली चौधरी, मोहम्मद इजराइल और मोहम्मद इलियास को 19 मार्च के क्रम में भेजा गया है, जबकि रतिया से विधायक जरनैल सिंह को 20 मार्च के संदर्भ में नया नोटिस थमाया गया है। नोटिस की इबारत बेहद सख्त है— “7 दिन में जवाब दें कि क्यों न आपके इस अनुचित आचरण के लिए आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए?” पार्टी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद किसी भी तरह की मोहलत नहीं दी जाएगी।

कांग्रेस में बढ़ती बेचैनी और भविष्य की रणनीति

सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह सख्ती दरअसल पार्टी के भीतर पनप रही गुटबाजी और भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए ‘डैमेज कंट्रोल’ की एक कोशिश है। अगर इन विधायकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो पार्टी इन्हें निष्कासित करने या विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करने जैसे कड़े कदम उठा सकती है। फिलहाल, सबकी नजरें इन 5 विधायकों के जवाब पर टिकी हैं कि क्या वे अपनी सफाई में ‘तकनीकी खामी’ का सहारा लेंगे या खुलकर बगावत का झंडा बुलंद करेंगे।

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