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Haryana Crop Damage: हरियाणा में ओलावृष्टि का कहर: झज्जर और हिसार समेत 7 जिलों में फसलें बर्बाद, सीएम ने दिए मुआवजे के आदेश

AAmandeep Singh
हरियाणा में ओलावृष्टि का कहर: झज्जर और हिसार समेत 7 जिलों में फसलें बर्बाद, सीएम ने दिए मुआवजे के आदेश
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हरियाणा। हरियाणा के अन्नदाता पर इस बार मौसम की दोहरी मार पड़ी है। मंगलवार को अचानक बदले मिजाज के बाद हुई मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, झज्जर, भिवानी, चरखी दादरी और रेवाड़ी के किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी सुनहरी गेहूं की बालियां ओलों की चोट से जमीन पर बिछ गई हैं, वहीं कटाई के लिए तैयार सरसों और चने की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों से आ रही तस्वीरें डराने वाली हैं, जहां खेतों में ओलों की सफेद चादर बिछी नजर आई। अकेले हिसार और फतेहाबाद के 80 से ज्यादा गांवों में फसलें पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं।

“मैं किसान का बेटा हूं, दर्द समझता हूं”: मुख्यमंत्री ने बंधाया ढांढस

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फसलों की बर्बादी की खबरों के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद फ्रंटफुट पर आए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं एक किसान का बेटा हूं और प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की टीस को अच्छी तरह समझता हूं।” मुख्यमंत्री ने प्रभावित जिलों के उपायुक्तों (DC) को तुरंत विशेष गिरदावरी शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि मुआवजे की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और संबंधित क्षेत्र के एसडीएम खुद खेतों में जाकर नुकसान का जायजा लें। सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द रिपोर्ट मुख्यालय पहुंचे ताकि किसानों के खातों में राहत राशि भेजी जा सके।

गांवों में बर्बादी का मंजर: हिसार से झज्जर तक सन्नाटा

नुकसान का दायरा इतना बड़ा है कि हिसार के मात्रश्याम, किरतान, आदमपुर और बालसमंद जैसे 40 गांवों में फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। झज्जर जिले के रईया, डावला और जहांगीरपुर जैसे गांवों में भी ओलावृष्टि ने गेहूं के दानों को झड़ा दिया है। फतेहाबाद के भट्टू कलां और ढिंगसरा बेल्ट में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलों की वजह से न केवल उत्पादन घटेगा, बल्कि दाने की चमक और गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ेगा, जिससे किसानों को मंडियों में सही भाव मिलना मुश्किल हो सकता है।

अलर्ट: अभी टला नहीं है खतरा, बरतें सावधानी

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन ने किसानों की धड़कनें और तेज कर दी हैं। अनुमान है कि 3 और 4 अप्रैल को राज्य में एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे गरज-चमक के साथ दोबारा ओले गिर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फिलहाल गेहूं की कटाई रोक दें और फसल के पूरी तरह सूखने का इंतजार करें। जिन किसानों ने सरसों की कटाई कर ली है, वे फसल को एक जगह इकट्ठा कर तिरपाल से ढंक लें ताकि बची-कुची उपज को सुरक्षित रखा जा सके।

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