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Digital Crop Survey Haryana: अब कागजों पर नहीं, लोकेशन पर होगी गिरदावरी: हरियाणा सरकार का बड़ा दांव

AAmandeep Singh
अब कागजों पर नहीं, लोकेशन पर होगी गिरदावरी: हरियाणा सरकार का बड़ा दांव
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हरियाणा। हरियाणा की खट्टर-सैनी सरकार ने राजस्व रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने के लिए एक ऐसा डिजिटल घेरा तैयार किया है, जिससे अब फसल के आंकड़ों में हेर-फेर करना नामुमकिन होगा। प्रदेश के राजस्व विभाग ने ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ (DCS) के जरिए गिरदावरी को पूरी तरह हाईटेक बनाने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत, पटवारी अब गांव के किसी चबूतरे या दफ्तर में बैठकर फसल का रिकॉर्ड दर्ज नहीं कर सकेंगे। उन्हें हर हाल में संबंधित खसरा नंबर यानी खेत के भीतर कदम रखना ही होगा। सरकार का सीधा मकसद उस फर्जीवाड़े को जड़ से मिटाना है, जहां कागजों पर फसल कुछ और दिखाई जाती थी और धरातल पर कुछ और मिलती थी।

जियो-टैगिंग से फसेगा फर्जीवाड़ा, सीधे किसान को होगा फायदा

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इस नई तकनीक की सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘जियो-टैगिंग’ और ‘टाइम-स्टैंप’ विशेषता है। नियम के मुताबिक, पटवारी को एक ही खेत की तीन अलग-अलग कोणों से फोटो खींचकर पोर्टल पर डालनी होगी। ऐप तभी काम करेगा जब मोबाइल की लोकेशन उस विशेष खेत की बाउंड्री के भीतर होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनका बीमा क्लेम अक्सर कंपनियों के विवादों में फंस जाता था। अब पोर्टल पर खेत की वास्तविक फोटो और डेटा मौजूद होने से बीमा कंपनियां मुआवजे के दावों को खारिज नहीं कर पाएंगी। साथ ही, मंडियों में वही फसल बेची जा सकेगी जो वास्तव में बोई गई है, जिससे ‘गेट पास’ के खेल पर भी अंकुश लगेगा।

धरातल पर चुनौतियां: पटवारियों ने खोला विरोध का मोर्चा

भले ही सरकार इसे क्रांतिकारी कदम बता रही हो, लेकिन फील्ड में तैनात पटवारियों के लिए यह किसी सिरदर्द से कम नहीं है। हिसार समेत प्रदेश भर के पटवारियों ने इस व्यवस्था को ‘अव्यावहारिक’ करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है। पटवार एसोसिएशन के जिला प्रधान आजाद सिंह का कहना है कि खेतों में मोबाइल सिग्नल की भारी समस्या है, जिससे फोटो अपलोड करने में घंटों लग रहे हैं। कहीं फसल इतनी घनी है कि खेत के बीच जाना मुमकिन नहीं, तो कहीं मोबाइल की बैटरी दगा दे रही है। पटवारियों के सामूहिक विरोध को देखते हुए फिलहाल जिला प्रशासन ने ‘अंडर ट्रेनी’ पटवारियों को मैदान में उतारा है ताकि पायलट प्रोजेक्ट का काम बीच में न लटके।

पुरानी बनाम नई व्यवस्था: क्या बदलेगा किसान का भाग्य?

पुरानी व्यवस्था में अक्सर पटवारी किसान के बताए अनुसार या पिछले रिकॉर्ड को देखकर एंट्री कर देते थे। इसमें मानवीय चूक और भ्रष्टाचार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती थी। इसके विपरीत, डिजिटल गिरदावरी डेटा को 100% सटीक बनाने का दावा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दिक्कतों के बावजूद, अगर यह तकनीक सफल रहती है तो प्रदेश के कृषि क्षेत्र में यह एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। फिलहाल हिसार के 175 गांवों के नतीजों पर सरकार की नजर है, जिसके बाद इसे पूरे हरियाणा में अनिवार्य रूप से लागू करने का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

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